त्विषा शर्मा के पिता ने कहा कि इस मामले को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी गंभीरता से लिया है। 'सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मामले का संज्ञान लिया। न्यायालय ने माना कि जांच में संस्थागत पक्षपात की आशंका रही है। यह केवल त्विषा का मामला नहीं है, बल्कि ऐसा उदाहरण बनना चाहिए जिससे भविष्य में किसी दूसरी बेटी को अपनी जान न गंवानी पड़े।'
कैंडल मार्च में के-ब्लॉक सहित सोसायटी के विभिन्न टावरों के निवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने ट्विशा को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस दौरान त्विषा शर्मा की मां रेखा शर्मा, भाई हर्षित शर्मा, डॉ. राशि ओबेरॉय शर्मा समेत परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
निवासी बोले न्याय में देरी
निवासियों ने कहा कि मामले को किसी भी स्तर पर कमजोर नहीं पड़ने दिया जाना चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि समय पर और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित नहीं किया गया तो समाज में गलत संदेश जाएगा। कई लोगों ने यह भी कहा कि परिवारों को बेटियों की शिकायतों और चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए तथा विवाह से पहले संबंधित पक्ष के बारे में पूरी जानकारी जुटानी चाहिए। मार्च के दौरान लोगों ने “त्विषा को न्याय दो” और “न्याय में देरी, न्याय से इंकार के बराबर है।” जैसे संदेशों वाले पोस्टर और तख्तियां लेकर न्याय की मांग की।
निवासियों ने बताया कि त्विषा शर्मा केवल अपने परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरी सोसायटी की प्रिय सदस्य थीं। उनकी असामयिक मृत्यु ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया है। सोसायटी के लोगों ने कहा कि मामले में हाल के दिनों में कुछ प्रगति अवश्य हुई है, लेकिन अभी भी निष्पक्ष, पारदर्शी और पूर्ण न्याय सुनिश्चित किया जाना बाकी है। इसी उद्देश्य से शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से एकजुटता दिखाई गई है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। मार्च के अंत में सभी लोगों ने मौन रखकर त्विषा शर्मा को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के साथ हर परिस्थिति में खड़े रहने का संकल्प दोहराया।