संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। लाखों रुपये के कथित घोटालों से जुड़ी आपत्तियों को नगर निगम के अधिकारी दबाए बैठे हैं। ऐसे में मुख्य नगर लेखा परीक्षक की तैनाती और उनके द्वारा किया जा रहा ऑडिट बेमाना साबित हो रहा है। उधर, नगर आयुक्त ने संबंधित विभागों से आपत्तियां निस्तारित करने के निर्देश लेखाधिकारी को दिए हैं। अन्यथा की स्थिति में संबंधित विभागाध्यक्ष का वेतन रोकने को कहा है।
नगर निगम में विभागीय अभिलेखों की आंतरिक लेखा परीक्षा के लिए मुख्य नगर लेखा परीक्षक द्वारा ऑडिट किया जाता है। ऑडिट के चलते ही चीजें व्यवस्थित रहती हैं, लेकिन नगर निगम सहारनपुर में आपत्तियों को अनदेखा किया जा रहा है।
मुख्य नगर लेखा परीक्षक आपत्ति लगाते हैं और संबंधित अधिकारी आपत्तियों की फाइलों को दबाकर बैठ जाते हैं। नगर निगम में मुख्य नगर लेखा परीक्षक की पहली तैनाती से अभी तक जितनी भी आपत्तियां ऑडिट में लगाई गई हैं। संबंधित अनुभागों के द्वारा उनका निस्तारण नहीं किया गया है।
इनमें लाखों रुपये के घोटालों की आपत्तियां भी शामिल हैं। नगर आयुक्त शिपू गिरि की ओर से इसे लेकर लेखाधिकारी को पत्र लिखा गया है। उन्होंने कहा है कि महत्वपूर्ण आपत्तियां लंबे समय तक अनिस्तारित रहना नगर निगम हित में नहीं है।
उन्होंने लेखाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि मुख्य नगर लेखा परीक्षक कार्यालय द्वारा दर्ज की गई सभी सामान्य/विशेष आपत्तियों, जिनका संबंधित अनुभाग द्वारा अभी तक निस्तारण नहीं कराया गया है। उन्हें सूची बनाकर उनके (नगर आयुक्त) स्तर से दोबारा संबंधित अनुभाग को निस्तारण के लिए भिजवाएं। यदि विभाग ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण में लापरवाही बरतते हैं तो संबंधित विभागाध्यक्ष का वेतन रोक दिया जाए।