दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद में प्रदूषण सूचकांक 400 पार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तर-पश्चिमी दिशाओं से चल रही बर्फीली हवाओं के साथ दिल्ली-एनसीआर में छा रहे घने कोहरे की वजह से प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। सोमवार को दिल्ली में प्रदूषण सूचकांक 434 दर्ज किया गया जो 19 दिसंबर के (410 सूचकांक) बाद सबसे अधिक है। इस साल का पहला दिन रहा, जब सबसे ज्यादा प्रदूषण स्तर मापा गया। इस साल 6 जनवरी को प्रदूषण सूचकांक 400 तक पहुंचा था। सोमवार को दिल्ली के साथ नोएडा और फरीदाबाद का प्रदूषण सूचकांक भी 434 रहा। ग्रेटर नोएडा का प्रदूषण सूचकांक 415 रहा। दिल्ली में दीपावली के बाद सबसे ज्यादा प्रदूषण सूचकांक 3 नवंबर को (450 सूचकांक) दर्ज किया गया था। उसके बाद से प्रदूषण के स्तर में गिरावट हुई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में मौसमी दशाएं अनुकूल न होने से सोमवार को प्रदूषण का स्तर बेहद गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। आने वाले तीन दिनों में राहत की उम्मीद नहीं है। सोमवार को दोपहर तक छाए बादल व धुंध के कारण प्रदूषण कण निचले सतह पर रहे। बोर्ड के अनुसार, सोमवार को दिल्ली में प्रदूषण सूचकांक 434 दर्ज किया गया जो रविवार के मुकाबले 65 सूचकांक अधिक रहा। एनसीआर के बहादुरगढ़ में 318, बल्लभगढ़ में 201, गाजियाबाद में 385, गुरुग्राम में 397, चरखी दादरी में 241 प्रदूषण सूचकांक दिल्ली से कम बेहद खराब व खराब श्रेणी में दर्ज किया गया।
सफर का पूर्वानुमान है कि अगले तीन दिन तक पश्चिम, उत्तर-पश्चिम दिशा से 16 किमी की गति तक हवाएं चलेंगी। सुबह घने से घना कोहरा छा सकता है, जिससे प्रदूषण के स्तर में राहत की उम्मीद नहीं है। 11 जनवरी को हवाओं के रुख में बदलाव से कुछ राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। 12 जनवरी को हल्की से बेहद हल्की हवाओं से प्रदूषण स्तर में और राहत मिलने की संभावना है।
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, मौसमी दशाओं के प्रतिकूल होने के कारण प्रदूषण के स्तर में बढ़त दर्ज हुई। सोमवार को दिल्ली में उत्तर-पश्चिम दिशा से चार से छह किमी की गति से हवाएं चलीं। तापमान कम होने के कारण सोमवार को मिक्सिंग हाइट 600 मीटर पर रही। वेंटिलेशन इंडेक्स भी औसत से कम रहा।
प्रदूषण के साथ बढ़ी सांस व दिल के मरीजों की समस्या
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ दिल व सांस के मरीजों की समस्या बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के साथ प्रदूषण के कण मिलकर मरीजों की समस्या बढ़ा देते हैं। प्रदूषण के कारण नाक, गले, आंख या त्वचा में जलन जैसी परेशानी होती है। साथ ही सिर दर्द, चक्कर आना और जी मिचलाना जैसे कारण बनते हैं। इसके अलावा सांस की बीमारी, अस्थमा का बढ़ना, न्यूमोनिया, फेफड़ों का कैंसर, हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं। इससे बचने के लिए कोशिश करनी चाहिए कि प्रदूषण वाले क्षेत्र में न जाएं। मास्क का प्रयोग करें।