-सुप्रीम कोर्ट के सरेंडर के आदेश की अवहेलना पड़ी भारी
-2015 के धोखाधड़ी केस में बीटा-2 पुलिस ने की कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने ग्रैंड वेनिस मॉल के मालिक सतेंद्र भसीन उर्फ मोंटू भसीन को गिरफ्तार कर शुक्रवार को सूरजपुर स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत में पेश किया। वर्ष 2015 में दर्ज धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट ने आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
आरोपी के खिलाफ लंबे समय से जांच चल रही थी। अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद वह पेश नहीं हो रहा था। आखिरकार शुक्रवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। दो अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द करते हुए एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। निर्धारित समय में सरेंडर नहीं करने पर उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था।
आठ अप्रैल को समय बढ़ाने की भसीन की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद भी अदालत के आदेशों की अनदेखी करते हुए उसने कानूनी उपायों के जरिए मामले को लंबित रखने की कोशिश की। एफआईआर और लंबित मामलों की जानकारी अदालत से छिपाने का भी आरोप उस पर हैं।
2019 में मिली थी जमानत
प्रोजेक्ट से जुड़े निवेशकों ने भसीन पर धोखाधड़ी, फंड डायवर्जन और आवंटन में अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वर्ष 2019 में आरोपी को जमानत दी गई थी, लेकिन शर्तों के उल्लंघन के कारण सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में जमानत रद्द कर दी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित चौहान ने रिमांड का विरोध करते हुए दलील दी कि इस केस में 15 अप्रैल, 2019 को मुख्य चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। पूरक चार्जशीट भी न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी हैं। जब जांच पूरी हो चुकी है और सभी साक्ष्य अदालत के समक्ष उपलब्ध हैं, तब पुलिस रिमांड की मांग कानूनी रूप से असंगत है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कराए थे 50 करोड़ जमा
छह नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को अंतरिम संरक्षण दिया था। इसके बाद 25 नवंबर, 2019 के आदेश के तहत करीब 50 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे। इसके अलावा 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित मामलों को समेकित करते हुए केस क्राइम नंबर 353/2015 को लीड केस घोषित किया था। जब सभी मामलों को एक साथ जोड़ा जा चुका है, तब अलग-अलग कार्रवाई और रिमांड की मांग न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है।