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सावधान: मोबाइल-स्क्रीन की लत युवाओं को बना रही न्यूरो मरीज, हो रही सिर दर्द-माइग्रेन और नींद की दिक्कत

Mon, 09 Jun 2025 10:30 PM IST
विकास कुमार आशीष चौरसिया, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

डॉक्टरों का मानना है कि फोन, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के चलते युवा पीढ़ी भी न्यरो संबंधी बीमारी की चपेट में आ रही है।
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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
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विस्तार
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शहरों में न्यूरो के मरीजों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में साल 2025 में जनवरी से मार्च तक में 822 मरीज न्यूरो संबंधी समस्या लेकर पहुंचे हैं, वहीं साल 2024 में 3088 मामले आए थे। डॉक्टरों का मानना है कि फोन, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के चलते युवा पीढ़ी भी न्यरो संबंधी बीमारी की चपेट में आ रही है। युवाओं में सिर दर्द, माइग्रेन, एकाग्रता की कमी के अलावा नींद में समस्या देखने को मिल रही है।

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जिम्स के अधिकारी ने बताया कि अभी हमारे पास न्यूरो स्पैशल्टी सर्जन नहीं है। जिसके चलते अभी हमें बाहर से सर्जन को बुलाकर मरीजों को सुविधा दी जा रही है। हमारा प्रयास है कि आने वाले न्यूरो संबंधी मरीजों को कम खर्च में जिम्स में ही उपचार दिलाया जा सके। इसके साथ ही हमने शासन से न्यूरो स्टाप की मांग रखी है। प्रयास है कि जल्द से जल्द हमारे पास खुद का स्टाप हो, जिससे जिम्स में आने वाले न्यूरो संबंधी बीमारी के मरीजों को और बेहतर कम दाम में सुविधा दी जा सके। उन्होंने बताया कि अभी हमारे यहां पर बाहर से डॉक्टर बुलाकर मरीजों का उपचार कराया जा रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि अधिक फोन, कंप्यूटर या टीवी का उपयोग करने से न्यूरो संबंधित समस्याओं की संभावना बढ़ सकती है। जैसे सिरदर्द, माइग्रेन, एकाग्रता की कमी, और नींद में समस्या भी हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि यह शहर नवविकसित होने के साथ ही नौकरीपेशा वाला शहर है। जिस कारण अधिकतर बाहर से आकर रहने वाले युवा या स्थानीय युवा भी कंप्यूटर और मोबाइल फोन में समय अधिक बिता रहे हैं। जिसके चलते उनमें न्यूरो संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं।

गर्मी के साथ ही ठंडी के मौसम में इन समस्याओं को न करें नजरअंदाज
डॉक्टरों ने बताया कि न्यूरो के मरीजों को गर्मी के साथ ही ठंडी के मौसम में भी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। गर्मी के मौसम में कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों और न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन के कारण मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। जिससे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, अवसाद और चिंता जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। साथ ही गर्मी के कारण माइग्रेन भी बढ़ सकता है। इस दौरान मरीजों को शरीर को ठंडा रखने और हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी जाती है। वही, ठंडी के मौसम में कुछ तंत्रिका संबंधी स्थितिया जैसे कि परिधीय न्यूरोपैथी, रेडिकुलोपैथी और मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) के लक्षण बढ़ सकते हैं। जिस कारण झुनझुनी, जलन और तेज दर्द महसूस हो सकते हैं। इसके अलावा स्क्लेरोसिस के कारण लोगों में थकान और दर्द की समस्या होने लगती है। ऐसे मरीजों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

सप्ताह में दो दिन लगती है ओपीडी
जिम्स में सप्ताह में दो दिन न्यूरो संबंधित बीमारी दिखाने के लिए ओपीडी लगाई जाती है। यह ओपीडी जनरल मेडिसिन ओपीडी में ही संचालित होती है। न्यूरो की ओपीडी मंगलवार और शुक्रवार को लगाई जाती है। ओपीडी में ग्रेनो, यमुना सिटी और नोएडा के अलावा आसपास के शहरों के लोग बड़ी संख्या में दिखाने आ रहे हैं। जिम्स प्रशासन का प्रयास है कि जल्द ही खुद के न्यूरो सर्जन मिल जाएं। जिससे मरीजों को और भी बेहतर उपचार की सुविधा मुहैया कराई जा सके।

साल 2024 मरीजों की संख्या
जनवरी से मार्च तक 822
अप्रैल से जून तक 1043
जुलाई से सितंबर तक 1000
अक्तूबर से दिसंबर तक 223
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साल 2025 मरीजों की संख्या
जनवरी   186
फरवरी 307
मार्च 329

जिम्स में आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए अभी बाहर से न्यूरो के डॉक्टर को बुलाकर उपचार कराया जा रहा है। प्रयास है कि जल्द से जल्द हमारे पास खुद के सर्जन हों, जिससे और मरीजों को सुविधा मिल सके। अभी सप्ताह में दो दिन ओपीडी लगती है। - डॉ. बिग्रेडियर राकेश गुप्ता, जिम्स निदेशक
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