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Noida News: बाजरे ने बढ़ाई किसानों की चिंता, घरों में रखने पर मजबूर

Mon, 29 Sep 2025 12:13 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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रोड़ी के खेत में बाजरे की फसल को ट्राॅली में भरते किसान। 
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सिरसा। जिले में 23 सितंबर से बाजरे की सरकारी खरीद शुरू है। इसकी खरीद का जिम्मा वेयरहाउस को सौंपा गया है। ऐसे में छह दिन बाद भी वेयरहाउस बाजरे की अधोमानक फसल का एक भी दाना नहीं खरीद पाई है लेकिन बाजरे की खरीद न होने से किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
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स्थानीय मंडी में वेयरहाउस एजेंसी की ओर से किसानों की बाजरे की फसल की कोई खरीद नहीं हुई है। इससे जिले के किसानों और आढ़तियों में इस स्थिति से भारी रोष है।
किसानों का कहना है कि एक तरफ सरकार किसान को बोनस के नाम पर 625 रुपये देने का वायदा कर रही है लेकिन बोनस तो तब मिलेगा जब सरकार फसल खरीदेगी। एक तरफ तो मौसम की मार के कारण न तो बाजरे की उपज बेहतर हो पाई है लेकिन सरकारी एजेंसी मानक पूरे न होने के बहाने बाजरा खरीदने से मना कर रही है।
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अनाज मंडी में बाजरे की रोजाना 8 से 9 ट्राॅली आ रहीं हैं किसान लेकिन एजेंसी की ओर से खरीद न होने पर किसानों को अपनी फसल वापस घरों में लेकर जानी पड़ रही है। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।

वेयरहाउस एजेंसी के मुताबिक बाजरे की फसल की खरीद के लिए मानक तय हैं। इसके रंग और गुणवत्ता के आधार पर एजेंसी उपज खरीदेगी लेकिन अभी आ रहे अधोमानक उपज की खरीद नहीं की जाएगी। ऐसे में किसानों को बाजरे की फसल के बचने के लिए संशय बना है।

आढ़ती एसोसिएशन भी पहल करेगी
मंडी प्रधान प्रेम बजाज ने बताया कि बाजरे के लिए किसानों सहित आढ़तियों में भी संशय बना है। इस बार मौसम में भारी बारिश के कारण बाजरे की उपज प्रभावित हुई है। मानक पूरे न होने के कारण एजेंसी बाजरे की खरीद नहीं कर रही है। इससे किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई है। मंडी प्रधान ने कहा कि समस्या सुलझाने के लिए आढ़ती एसोसिएशन भी पहल करेगी।

आधी रह गई बाजरे की उपज
गांव रोड़ी के किसान नायब सिंह और जसपाल सिंह ने बताया कि इस बार बाजरे की फसल पर बारिश का बुरा असर हुआ है। जहां पहले वर्षों में एक एकड़ में 10 क्विंटल के करीब बाजरे की फसल होती थी, इस बार पांच क्विंटल के करीब ही फसल की उपज हो पाई है। इससे किसानों का खर्च ही मुश्किल से पूरा हो पाएगा। मंडी में एजेंसी की ओर से खरीद भी नहीं हो पा रही है। इसलिए फसल को घर पर रखना पड़ा है।
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