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मेडिकल कॉलेज को वर्षों बाद भी नहीं मिली मान्यता

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अंतराम खटाना
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नूंह। वर्षों पूर्व नूंह के नलहड में मेडिकल कॉलेज के खुलने से जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुधार की काफी उम्मीदें थीं। हालांकि अब उनकी सभी उम्मीदें धूमिल होती जा रही हैं। इसका मुख्य कारण 2012 से बने मेडिकल कॉलेज को अभी तक नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की स्थाई मान्यता का नहीं मिलना है। इससे मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ के अलावा यहां पढ़नेे वाले छात्र काफी मायूस हैं।
दूसरी ओर एनएमसी की स्थाई मान्यता नहीं मिलने से कॉलेज में जरूरी संसाधनों का अभाव बढ़ता जा रहा है। जिससे जिले की अवाम को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
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वर्ष 2012 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जिले को साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये के मेडिकल कॉलेज की सौगात दी थी। मेडिकल कॉलेज की मान्यता देने के उद्देश्य से बीते अक्टूबर 2020 में एनएमसी की टीम ने ऑनलाइन निरीक्षण भी किया। कमीशन की टीम ने मेडिकल कॉलेज में कई खामियों का जिक्र किया। जिसमें टीचिंग फैकल्टी, रेजिडेंट्स के अलावा अन्य कई कमियां सामने आई है।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में लगी हुई अल्ट्रासाउंड व एक्सरे मशीन का ठप होना पाया गया। बेरियम मील यानि पेट का बड़ा रोग, आईवीपी यानि किडनी की जांच नहीं होने को भी दर्शाया गया। इन कमियों को दूर करने के लिए मेडिकल कॉलेज से कहा गया है।
दूसरी ओर अभी तक शहीद हसन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के 2013-14 एवं 2014-15 बैच को मान्यता दी गई। अन्य सभी एमबीबीएस बैच की मान्यता एमएमसी की शर्तें पूरी न करने के कारण अधूरे हैं। वहीं मान्यता न होने से विद्यार्थियों के मन में भय है कि पता नहीं उनके भविष्य का क्या होगा। मेडिकल कॉलेज में एनएमसी ने इस बारे कॉलेज में सभी कमियों को पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा अभी इन कमियों को पूरा नहीं करा पा रहा है।
हजारों लोगों की होती है ओपीडी
जिले की करीब साढ़े तेरह लाख की आबादी पर एक ही मेडिकल कॉलेज है। किसी भी बड़े रोग का इस कॉलेज में कोई इलाज नहीं है। जबकि यहां पर अभी भी हर दिन हजारों लोग अपना इलाज कराने आ रहे हैं। यहां पर आज भी बड़े रोगों के इलाज के लिए लोगों को एनसीआर की दौड़ लगानी पड़ती है। अगर कॉलेज को मान्यता मिल जाए तो एनएमसी द्वारा यहां अन्य सुविधाओं को बढ़ावा मिल सकता है।
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बयान
मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा यहां सभी कमियों को पूरा कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। कॉलेज में डॉक्टरों के काफी पद खाली हैं, जिससे स्थाई मान्यता मिलने में परेशानी आ रही है। इसके अलावा कॉलेज में अल्ट्रासाउंड का अभाव है। - डॉक्टर संगीता, कार्यकारी निदेशक नलहड मेडिकल कॉलेज।
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