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Noida News: मकोका की पूर्व अनुमति केवल औपचारिकता नहीं- हाईकोर्ट

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-अदालत ने पश्चिमी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त द्वारा जारी अनुमति को रद्द किया
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (एमसीओसीए) के दुरुपयोग को रोकने के लिए याचिकाकर्ता को अंतरिम संरक्षण दिया है। न्यायमूर्ति संजीव नरुला की एकलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धारा 23(1)(अ) के तहत पूर्व-अनुमति कोई खोखली औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसमें वास्तविक मानसिक अनुप्रयोग (जेनुइन एप्लीकेशन ऑफ माइंड) का प्रतिबिंब होना चाहिए।
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याचिकाकर्ता अमित सिंह ने वेस्ट रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त द्वारा जारी अनुमति को चुनौती दी थी, जिसमें मकोका की धारा 3 और 4 को लागू किया गया था। याचिका में दावा किया गया कि अनुमति के आधार पर दर्ज पूर्व अपराधों में लूट, उगाही या हत्या के प्रयास जैसे अपराध शामिल नहीं थे, जो स्वयं अनुमति में बताए गए थे। याचिकाकर्ता के वकील राहुल शर्मा ने बताया कि अदालत ने इस अनुमति की गुणवत्ता की जांच की और पाया कि यह केवल यांत्रिक पुनरावृत्ति (मैकेनिकल रिसाइटेशन) पर आधारित थी, न कि तर्कसंगत संतुष्टि (रीजनड सैटिस्फैक्शन) पर। अदालत ने पुलिस को याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी जबरन कार्रवाई से रोकने का निर्देश दिया है, जब तक कि पूर्व-अनुमति की वैधता पर पुनर्विचार पर सुनवाई न हो।
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