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Noida News: मेंटेनेंस विवाद ने बढ़ाई आम्रपाली जोडिएक की सियासत

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गौरव असाती
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पेनल्टी लगाए जाने के आरोपों के बाद एओए अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। सेक्टर-120 स्थित आम्रपाली जोडिएक सोसाइटी में 55 पैसे प्रति वर्ग फुट के मेंटेनेंस शुल्क को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एओए (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) बोर्ड के इस्तीफे तक पहुंच गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार के अंतरिम आदेश के बावजूद बढ़े हुए मेंटेनेंस शुल्क की वसूली और निवासियों पर 500 रुपये की पेनल्टी लगाए जाने के आरोपों के बाद एओए अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है। शनिवार को होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) में वर्तमान बोर्ड को भंग कर नए चुनाव कराने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

सोसाइटी में करीब 2250 फ्लैट हैं। वर्ष 2018 से यहां मेंटेनेंस शुल्क 1.55 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित है। एओए का कहना है कि बढ़ती महंगाई, न्यूनतम वेतन और रखरखाव के खर्चों में इजाफे के कारण शुल्क बढ़ाकर 2.10 रुपये प्रति वर्ग फुट करना आवश्यक था। हालांकि, कुछ निवासियों ने इस फैसले का विरोध किया और मामला डिप्टी रजिस्ट्रार तक पहुंच गया। अंतरिम आदेश के बाद भी बढ़े हुए शुल्क के बिल जारी होने और समय पर भुगतान नहीं करने वालों से 500 रुपये पेनल्टी वसूले जाने पर विवाद और गहरा गया। विरोध बढ़ने के बाद एओए ने बढ़ी हुई दरें वापस लेने और जिन निवासियों से अतिरिक्त राशि और पेनल्टी ली गई थी, उसे समायोजित करने का फैसला किया। इसके बावजूद विवाद शांत नहीं हुआ। अब 25 जुलाई को बुलाई गई जीबीएम में तीन प्रमुख प्रस्ताव रखे जाएंगे। इनमें वित्तीय वर्ष के खातों को मंजूरी देना, वर्तमान बोर्ड को कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग करना और नए बोर्ड के चुनाव के लिए चुनाव समिति का गठन शामिल है।
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बार-बार एओए बदलने से विकास कार्य होते हैं प्रभावित

निवासियों का आरोप है कि पिछले वर्ष अप्रैल में हुई जीबीएम में एओए ने करीब 1.13 करोड़ रुपये के घाटे की जानकारी दी थी। उनका कहना है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के खातों में अनियमितताओं की आशंका है। इस संबंध में डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की गई है ताकि घाटे की वास्तविक वजह सामने आ सके। वहीं, एओए का कहना है कि सोसाइटी अब भी अधूरी है और एनबीसीसी की ओर से निर्माण और सुधार कार्य जारी हैं। ऐसे में पुराने मेंटेनेंस शुल्क पर सोसाइटी का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। निवासियों का कहना है कि बार-बार एओए बोर्ड बदलने से सोसाइटी के विकास कार्यों पर भी असर पड़ता है। उनका मानना है कि बोर्ड को कार्यकाल पूरा करने के बजाय बीच में इस्तीफा देना जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है। दूसरी ओर कुछ लोग नए चुनाव को पारदर्शिता बहाल करने का अवसर मान रहे हैं।
समय से पहले पद छोड़ना जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा है। निवासियों ने बदलाव की उम्मीद में बोर्ड चुना था, लेकिन विवाद बढ़ते ही इस्तीफा दे दिया गया। इससे लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है। -के.के मित्रा
लगातार एओए बदलने से सोसाइटी का माहौल प्रभावित होता है। यदि वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि निवासियों का विश्वास कायम रह सके। -गौरव
निवासियों के पैसे का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। यदि वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें हैं तो फॉरेंसिक ऑडिट कराकर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। -अर्चना
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हमारी सोसाइटी अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है। बढ़ती लागत के कारण मेंटेनेंस शुल्क बढ़ाना जरूरी था। समिति बनाकर नए चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -विश्वनाथ भारद्वाज, संयुक्त सचिव, एओए

गौरव असाती

गौरव असाती

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