मैनपुरी। काव्य ग्रंथ के प्रकाशन में त्रुटियां करने और शिकायत के बाद भी सही नहीं करने पर बीएफसी पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड विराजखंड गोमतीनगर लखनऊ पर 15000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के खाते में जुर्माने की धनराशि 45 दिन में जमा करने का आदेश दिया गया है।शहर के आगरा रोड जीआईसी कंपाउंड के रहने वाले डॉ. एसी तिवारी दीवानी में वकालत करते हैं। वह साहित्यकार के साथ ही कवि भी हैं। उन्होंने 24 जनवरी 2022 को बीएफसी पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड विराजखंड गोमतीनगर लखनऊ में प्रकाशन के लिए ज्वाला नाम का खंड काव्य दिया था। एक हजार रुपया देकर पंजीकरण भी कराया था। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 28 दिसंबर 2023 को दायर की गई याचिका में बताया कि प्रकाशन कंपनी ने 10 प्रतियों का प्रकाशन करके दिया। इसमें एक नहीं तमाम त्रुटियां थीं। शिकायत करने के बाद भी उनको सही नहीं किया।
याचिका में कहा गया कि प्रकाशन कंपनी प्रतिष्ठित कंपनी है। उस पर अविश्वास करने का कोई कारण भी नहीं है। प्रकाशन के बाद से वह मानसिक तनाव में हैं। प्रकाशन कंपनी नोटिस का भी जवाब नहीं दे रही है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय, सदस्य नीतिका दास, नंद कुमार ने याचिका की सुनवाई की। आदेश में कहा कि प्रकाशन कंपनी आयोग के खाते में जुर्माने की धनराशि 15000 रुपया 45 दिन में जमा करे। इस धनराशि में 10000 रुपया मानसिक कष्ट तथा 5000 रुपया वाद व्यय के शामिल हैं।
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आदेश के मुख्य बिंदु
-45 दिन में 10 प्रतियों का पुन: प्रकाशन करें। इसका कोई शुल्क देय नहीं होगा।
-याचिका दायर करने वाले 15 दिन में उनको भेजी गई प्रतियां कंपनी को वापस करें।