अगर जज़्बा सच्चा हो तो शरीर की सीमाएं भी मंज़िल पाने से नहीं रोक सकतीं। यह साबित किया है। खैर कस्बा के समीप स्थित 24 वैदिक उपवन ट्रस्ट की संचालिका डॉ. शालिनी शर्मा ने। स्वयं 90 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद वह वर्षों से दिव्यांगजनों के जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान का उजाला भर रही हैं।
गांव अर्राना में संचालित उनकी संस्था 24 वैदिक उपवन ट्रस्ट अब तक लगभग 3200 से अधिक दिव्यांगजनों को लाभान्वित कर चुकी है। संस्था जनपद के सभी 12 ब्लॉकों में सक्रिय है और दिव्यांगजनों को स्वरोजगार उपकरण, कृत्रिम अंग, पेंशन तथा उदीद कार्ड जैसी सुविधाएं दिलाने में निरंतर कार्यरत है। संस्था अब तक 1800 से अधिक लोगों के उदीद कार्ड जारी कराने में सफल रही है, जबकि 1650 से अधिक दिव्यांगजनों को उपकरण और 300 से अधिक लोगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए हैं।
आत्मनिर्भर बनाने के साथ निशुल्क शिक्षा
शालिनी शर्मा की संस्था दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मोमबत्ती, राखी, मिठाई के डिब्बे, खिलौने आदि बनाना सिखाती है। इससे न केवल दिव्यांगों का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि वे स्वयं के प्रयासों से रोजगार का साधन भी जुटा रहे हैं। संस्थापक ममता शर्मा गांव अर्राना में 350 से अधिक असहाय व कमजोर बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रही हैं। इनमें से 15 बालिकाओं को गोद लेकर उनके संपूर्ण भरण-पोषण की जिम्मेदारी भी संस्था ने उठाई है।
मूक-बधिर दिव्यांगों की भी मदद
डॉ. शालिनी शर्मा ने मास्टर ऑफ सोशल वर्क में पीएचडी की है। वे स्वयं दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, फिर भी अपने पति अभिषेक शर्मा (जो स्वयं भी दिव्यांग हैं) और पुत्र अधिक के साथ एक सामान्य जीवन जी रही हैं। हर शुक्रवार व शनिवार को वे थाने में परिवार परामर्श केंद्र में परामर्शदाता कार्य करती हैं। उन्होंने मूक-बधिर भाषा का प्रशिक्षण भी लिया है।