जीवनशैली में सुधार और समय पर इलाज से प्रजनन क्षमता में हो सकता है सुधार
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। आधुनिक जीवनशैली, मानसिक तनाव और खानपान की गलत आदतें आज के समय में थायरॉयड, मोटापा और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, ये बीमारियां अब केवल सामान्य शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महिला और पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) पर भी बेहद गहरा और चिंताजनक प्रहार कर रही हैं।
थायरॉयड का असंतुलन जहां महिलाओं के मासिक धर्म और ओव्यूलेशन चक्र को बिगाड़कर गर्भधारण में बाधा बनता है, वहीं पुरुषों में यह स्पर्म की गुणवत्ता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इसी तरह, बढ़ता मोटापा शरीर में अत्यधिक वसा जमा कर हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सुमन मेहला के अनुसार, अनियंत्रित डायबिटीज भी गर्भधारण की संभावना को कम कर सकती है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने से महिलाओं में हार्मोनल गड़बड़ी और ओव्यूलेशन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वही, पुरुषों में डायबिटीज यौन क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। उनका कहना है कि इन तीनों स्थितियों को नियंत्रित कर फर्टिलिटी में सुधार संभव है। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना, ब्लड शुगर और थायरॉयड की नियमित जांच तथा डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार जरूरी है।
समय पर लें विशेषज्ञ की सलाह
डॉ. सुमन मेहला का कहना है कि यदि किसी दंपति को एक वर्ष तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है, या महिला की उम्र 35 वर्ष या उससे अधिक है और छह महीने के प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है, तो बिना देरी किए स्त्री रोग एवं फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से स्वस्थ गर्भावस्था की संभावना काफी बढ़ाई जा सकती है।