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Noida News: खेल-खेल में सीखने से बनेगा बच्चों का भविष्य

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शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने प्राथमिक शिक्षकों को दिए निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी

हथीन। बच्चा होमवर्क के नाम पर एक ही शब्द को बार-बार लिखकर थक जाता है, इससे न तो अभ्यास हो पा रहा है और न ही ज्ञान। इन परिस्थितियों से निपटने के लिए बच्चों को सिर्फ अभ्यास न करवाएं बल्कि उन्हें खेल-खेल की भावना से सीखने के लिए प्रेरित करें।
शिक्षा विभाग ने प्राथमिक स्कूलों में आयोजित की गई ज्ञान परीक्षा के दौरान जो परिणाम देखे, उन्हें और प्रभावी ढंग से लागू करने का फरमान जारी किया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कॉपी में बार-बार लिखवाना प्रभावी अभ्यास नहीं है। पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाय यदि उसमें विविधता लाई जाए, तो बच्चे न केवल जल्दी सीखते हैं बल्कि उसे लंबे समय तक याद भी रखते हैं।
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रटने की परंपरा से बाहर निकलने की जरूरत



शिक्षा विभाग की तरफ से इस कार्य के लिए प्राथमिक शिक्षकों को कुछ टिप्स भी दिए गए हैं। इसके तहत बताया गया है कि स्कूलों और घरों में बच्चों को एक ही अक्षर या शब्द को पूरी कॉपी भरने के लिए दे दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया बच्चों में पढ़ाई के प्रति अरुचि पैदा करते हुए दुविधा की स्थिति पैदा करती है। इसलिए रटने की परंपरा से बाहर निकलने की जरूरत है। शिक्षा विशेषज्ञों ने शिक्षकों की पहचान की तकनीक अपनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत ब्लैक बोर्ड या चार्ट पर लिखे शब्दों में से किसी विशेष अक्षर लगाएं ताकि बच्चे की एकाग्रता बढ़े।
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क्या कहते है अधिकारी

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अशोक बघेल ने बताया कि अभ्यास का मतलब संख्या नहीं बल्कि गुणवत्ता है। अभ्यास तभी असरदार होता है, जब वह पर्याप्त होने के साथ-साथ विविध तरीकों से कराया जाए। खेल, चित्रकारी और पहचान की गतिविधियों को शामिल करने से बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है।
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