देश के लाखों लोगों से अरबों रुपये की ठगी वाले बाइक बोट फर्जीवाड़े के कई मुख्य आरोपी अब तक फरार हैं। पीड़ितों की गाढ़ी कमाई से खरीदी गई संपत्ति भी अभी पूरी तरह से जब्त नहीं की गई है। इसी से अब तक निवेशकों को रुपया वापस मिलने का विश्वास नहीं हो पाया। वहीं, आरोपियों की मदद करने वाले अधिकारी, नेता और अभिनेताओं पर भी शिकंजा पूरी तरह नहीं कस पाया है।
यही कारण है लगातार निवेशक इस मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई से फर्जीवाड़े से जांच की मांग कर रहे हैं। अब, ऑल इंडिया बाइक बोट टैक्सी यूनियन ने सीबीआई जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
गौतमबुद्ध नगर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोट गांव में बाइक बोट यानी गर्वित इनोवेटिव प्रमोटर्स का दफ्तर बनाकर देश भर के निवेशकों से धन दोगुना करने के नाम पर ठगी की शुरुआत की गई थी। आरोपी बेखौफ होकर सोशल मीडिया पर कंपनी व योजना का प्रचार करते रहे। एक साल में धन दोगुना करने के लालच के अलावा कंपनी के अधिकांश शहरों, जिलों में दफ्तर खुलने के दौरान अधिकारियों, नेताओं और अभिनेताओं की मौजूदगी लोगों में विश्वास पैदा करती थी।
इनकी मौजूदगी के कारण ही अधिकांश निवेशकों ने कंपनी में धन निवेश किया लेकिन अब दो साल की जांच के बाद भी एक भी अफसर और बड़े नेता पर ऐसी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे निवेशकों को पूर्ण न्याय की आस जग सके। हालांकि आरोपियों की गिरफ्तारी और बरामदगी को लेकर वे उम्मीद कायम रखे है।
बिचौलिये और दलालों पर कसेगा शिकंजा
बाइक बोट फर्जीवाड़े में सौ से अधिक ऐसे आरोपी है जिन्होंने बिचौलिये और दलालों की भूमिका निभाई है। ये आरोपी कुछ अधिकारियों से आरोपियों की सांठगांठ कराने, जांच प्रभावित करने के अलावा फर्जीवाड़े से एकत्रित की गई रकम को विभिन्न संपत्तियों में वेश कराने व काले धन को सफेद करने में शामिल रहे हैं। इनमें सबसे अधिक आरोपी गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर और मेरठ के हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दिया हवाला
ऑल इंडिया बाइक बोट टैक्सी फाउंडेशन के संयोजक मदन लाल आजाद ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में हवाला दिया है कि यह फर्जीवाड़ा देश भर के कई राज्यों से जुड़ा है। इस फर्जीवाड़े में कई अधिकारी, नेता, विधायक, अभिनेता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्त रहे हैं। कई आरोपियों ने बिचौलिये और दलालों की भूमिका निभाई है। इसके अलावा कई आरोपियों के विदेश में छिपे होने की आशंका है। आरोपियों ने फर्जीवाड़े की बड़ी रकम को भी विदेश में निवेश किया है। ऐसे में सीबीआई जांच से ही निवेशकों को न्याय और सभी आरोपियों को सजा मिल सकती है।