बिजनौर। बस में धामपुर से मुरादाबाद जा रही 19 वर्षीय लड़की एक लड़के सेे अपनी सीट बदलती है। आगे चलकर बस का एक्सीडेंट होने से उस लड़के की मौत हो जाती है। हादसे में मौत के बाद लड़की को लगा, काश वह सीट नहीं बदलती तो वह लड़का जिंदा होता। यही सोच धीरे-धीरे उसे मानसिक बीमारी की तरफ ले गई। मेडिकल अस्पताल में काउंसलिंग में पता चला कि लड़की हादसे के बाद पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) का शिकार हो गई है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस आज मनाया जा रहा है। इस बार की थीम आपदा और आपातकाल की परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच है। हर दूसरा व्यक्ति मानसिक बीमारियों की चपेट में है। मेडिकल अस्पताल के मनकक्ष में रोजाना 60 मरीज मानसिक बीमारियों के पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज सिर दर्द, तनाव, एंग्जायटी, ओसीडी, स्किजोफ्रेनिया बीमारी से ग्रसित हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञ इसका कारण परिवार का सही माहौल नहीं होना मान रहे हैं। पारिवारिक कलह की वजह से लोग आत्महत्या करने तक की कोशिश कर रहे हैं। मानसिक बीमारी से निजात के लिए दवाई से ज्यादा परिवार का अच्छा माहौल है। अच्छे विचार व अच्छी संगत से बीमारी से जल्दी छुटकारा मिल सकता है।
केस नंबर एक
बिजनौर निवासी 32 वर्षीय पुरुष पिछले दो महीनों से लगातार उदास है। किसी काम में रुचि नहीं ले रहा है। पुरुष का इस दौरान वजन कम हो गया। आत्महत्या के विचार कभी-कभी आते हैं, लेकिन प्रयास नहीं किया।
केस नंबर दो
बिजनौर निवासी 27 वर्षीय युवती पिछले छह महीनों से लगातार चिंता और बेचैनी की शिकार है। छोटी-छोटी बातों पर जरूरत से ज्यादा चिंता करती है। स्वास्थ्य, पैसे और भविष्य को लेकर लगातार परेशान रहती है।
केस नंबर तीन
बिजनौर निवासी 24 वर्षीय युवक ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) की चपेट में है। पिछले एक वर्ष से बार-बार हाथ धोने की आदत और गंदगी का डर सताता रहता है। कभी-कभी एक-दो घंटे तक हाथ धोता है। इससे दैनिक जीवन और पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
केस नंबर चार
बिजनौर की 29 वर्षीय युवती सायकोसिस (स्किजोफ्रेनिया) से ग्रसित है। पिछले आठ महीनों से आवाजे सुनना और शक-संदेह जैसी समस्या हो रही है। उसे लगता है कि पड़ोसी उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं, उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। अकेले में बात करती है।
मानसिक बीमारियों के लक्षण
-सिर में दर्द होना
-नींद में कमी होना
-उदास होना
-ठीक से समझने या बोलने में परेशानी होना
-सामान्य चीजें समझाने में दिक्कत होना
मानसिक बीमारियों से बचाव
-नियमित रूप से व्यायाम करें
-अच्छी नींद लें
-शाम को जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठें
-परिवार के साथ जुड़ें
-परिवार के किसी सदस्य को अपनी समस्या बताएं
-सोशल मीडिया से तुलना न करें
-लक्षणों को नजर अंदाज न करें
वर्जन::
मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है, जितना शारीरिक स्वास्थ्य जरूरी है। परेशानी होने पर चिकित्सक परामर्श लेना कमजोरी नहीं है। सही समय पर सही परामर्श लेने से समस्या से निदान मिलता है।
....डॉ. प्रीति चौहान, मानसिक रोग विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल
वर्जन::
मानसिक समस्या लाइलाज नहीं है। अगर, समय से ध्यान दिया जाए तो मरीज ठीक हो सकता है। इसके अलावा परिवार का सुखद माहौल मानसिक बीमारी से बाहर निकलने में मदद करता है। रोजाना व्यायाम करें।
....आयुषी दीक्षित, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, मेडिकल अस्पताल