जीरो डिस्प्यूट विलेज पर काम कर दिए जाएंगे आबादी भूखंड
- सैनी और रोजा याकूबपुर में किसानों को आबादी भूखंड देने के लिए अलग-अलग एसीईओ को मिली जिम्मेदारी
- सीईओ ने कहा, एक महीने में दोनों गांव के किसानों को दें उनके भूखंड
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नाेएडा। किसानों के जमीन से जुड़े विवादों को अब एसीईओ की निगरानी में खत्म किया जाएगा। इसके लिए जीरो डिस्प्यूट विलेज की नीति पर काम होगा। इसकी शुरुआत सीईओ रवि कुमार एनजी ने ग्रेनो वेस्ट के सैनी और रोजा याकूबपुर से की है। अगले एक महीने में यहां 253 भूखंड पात्र किसानों को दिए जाएंगे।
बुधवार को किसानों के विवादों के निस्तारण के लिए हो रही समीक्षा में सीईओ ने अधिकारियों को बेवजह की देरी के लिए आड़े हाथ लिया। सैनी के लिए एसीईओ सुमित यादव और रोजा याकूबपुर के लिए एसीईओ प्रेरणा सिंह को प्रभारी बनाया गया है। इन दोनों को सभी संबंधित विभाग और समितियों से अनुमोदन या संस्तुति कराते हुए किसानों को भूखंड दिलाने होंगे। सीईओ के निर्देश पर एसीईओ सुमित यादव ने सैनी गांव में उस जमीन का मुआयना भी किया जहां भूखंड दिए जाने हैं।
सीईओ का कहना है कि नियोजन विभाग तुरंत सैनी में 76 और रोजा याकूबपुर में 177 भूखंड के लिए पात्रता की सूची का प्रकाशन कराए। इसके साथ ही जरूरी प्लानिंग, शिफ्टिंग कमेटी की संस्तुति जैसी प्रक्रियाएं पूरी कराए। नियोजन विभाग को 10 दिन का समय जरूरत के मुताबिक री-प्लानिंग के लिए दोनों गांव में दिया गया है। वर्क सर्किंल भी नियोजन को इसमें मदद करेगा। एक महीने के अंदर भूखंड दिए जाएंगे। इसके अलावा घंघौला में 38 भूखंड के लिए तुरंत प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उन्होंने कहा है। बचे हुए 18 दावेदारों की पात्रता सत्यापन के लिए ओएसडी अभिषेक पाठक को लगाया गया है।