ग्रेटर नोएडा टर्मिनल पर आगे बढ़ा ग्रेनो प्राधिकरण, अंसल से मिलेगी जमीन
- बुलंदशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण से समन्वय कर निजी हाइटेक टाउनशिप से खाली कराई जा रही जमीन
- शासन की उच्चस्तरीय समिति ने दी मंजूरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। आनंद विहार टर्मिनल की तर्ज पर विकसित हो रहे बोडाकी के पास ग्रेटर नोएडा टर्मिनल पर ग्रेनो प्राधिकरण एक कदम आगे बढ़ गया है। यहां जरूरी जमीन और इसके विस्थापितों के पुनर्वास के लिए अंसल एपीआई से वापस ली जा रही सुशांत मेगापोलिस टाउनशिप की जमीन पर भूखंड विकसित कर दिए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि टाउनशिप से जमीन वापस लिए जाने के प्रस्ताव को हाइटेक टाउनशिप नीति के मामले देखने वाली शासन की उच्चस्तरीय समिति ने मंजूरी दे दी है।
सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया कि बोडाकी के पास करीब सात गांव की जमीन ग्रेटर नोएडा टर्मिनल के लिए ली जानी है। इसकी वजह से यहां से विस्थापित करीब 1600 परिवारों के लिए पुनर्वास नीति तय होनी है। इसके लिए नजदीक में ही जमीन की आवश्यकता होगी। सुशांत मेगापोलिस टाउनशिप में जो जमीन ली गई हैं, उनमें शिव नाडर यूनिवर्सिटी के पास नई बस्ती और दूसरे गांव की जमीन भी शामिल है। टाउनशिप का विकास लंबे समय से बाधित है। ऐसे में लाइसेंस देने वाले बुलंदशहर-खुर्जा विकास प्राधिकरण ने आंशिक जमीन वापस लिए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। उच्चस्तरीय समिति से मंजूरी के बाद अब जल्दी ही इसको लेकर आदेश भी जारी हो जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा टर्मिनल का विकास प्रदेश और केंद्र दाेनों की प्राथमिकता में है। इससे जहां आनंद विहार और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा। वहीं एक ही कैंपस में बस और ट्रेन के अलावा मेट्रो सेवा भी यहां से मिल सकेगी।
दिवालिया की प्रक्रिया में फंसा विकास : अंसल एपीआई की हाइटेक टाउनशिप सुशांत मेगापोलिस का विकास लंबे समय से बाधित है। इस प्रोजेक्ट के दिवालिया होने की प्रक्रिया में जाने के बाद विकास कार्य भी यहां ठप हो गए। बाहरी विकासकर्ता के सहयोग से कुछ हिस्से में संपत्तियां विकसित करने का प्रयास यहां किया गया लेकिन यह भी पूरी तरह सफल नहीं रहा।