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ग्रेटर नोएडा: प्रदेश के पहले लाॅजिस्टिक हब के लिए जमीन अधिग्रहण प्रकिया शुरू, यीडा ने अलीगढ़ भेजा प्रस्ताव

Fri, 17 Mar 2023 09:33 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा

सार

पहले चरण के लिए जमीन अधिग्रहण को बोर्ड बैठक में 364 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को हरी झंडी मिल गई थी। अब इसके अधिग्रहण प्रक्रिया के संबंध में अलीगढ़ प्रशासन को प्रस्ताव भेज दिया है।
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Yamuna Authority - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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नोएडा एयरपोर्ट के पास टप्पल-बाजना में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यमुना प्राधिकरण (यीडा) ने अलीगढ़ प्रशासन को 364 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा है। प्रदेश के पहले मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब पर 3500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें हजारों करोड़ का निवेश होगा। साथ ही बड़ी तादाद में लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

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यीडा के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि टप्पल के स्यौरोल और आसपास के गांव में लॉजिस्टिक हब में वेयरहाउसिंग (स्टोरेज के लिए), कंटेनर यार्ड और रेल जोन बनाए जाएंगे। इसमें 10 हेक्टेयर क्षेत्र में व्यावसायिक, 12 हेक्टेयर में संस्थागत और 24 हेक्टेयर आवासीय योजना विकसित की जाएगी।

इस पर करीब 3500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसे तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पीपीपी मॉडल पर इसके निर्माण के लिए परियोजना का टेंडर निकालने की योजना तैयार की जा रही है। पूरी परियोजना को करीब 950 हेक्टेयर में विकसित किया जाना है।
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पहले चरण के लिए जमीन अधिग्रहण को बोर्ड बैठक में 364 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को हरी झंडी मिल गई थी। अब इसके अधिग्रहण प्रक्रिया के संबंध में अलीगढ़ प्रशासन को प्रस्ताव भेज दिया है। गौरतलब है कि उक्त जमीन को टप्पल नगर पंचायत में शामिल कर दिया गया था। जिसे बाद में निरस्त कराकर यीडा में उक्त भूमि को मर्ज किया गया।

मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क में यह होंगे नियम लागू
यीडा विकासकर्ता कंपनी को 45 साल के लिए लाइसेंस देगी। जमीन देने के बाद सभी कार्य संबंधित विकासकर्ता काम करेगी। वेयरहाउस बेचने का भी काम भी कंपनी के जिम्मे होगा। प्राधिकरण को प्रतिवर्ष 10 करोड़ लाइसेंस फीस मिलेगी। जिसमें हर साल पांच फीसदी की बढ़ोतरी होगी। लाभ में पहले साल साढे़ 10 फीसदी की हिस्सेदारी रहेगी। यमुना प्राधिकरण विकासकर्ता कंपनी को जमीन उपलब्ध कराएगा और उसका भुगतान भी स्वयं करेगा। जबकि प्रतिवर्ष फीस और लाभ में हिस्सेदारी से करीब 16 साल में ही जमीन की कीमत को प्राप्त करेगा। उसके बाद जो हिस्सेदारी आएगी वह प्राधिकरण की आय में शामिल हो जाएगी।

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