-बाजार में कान्हा की पोशाक की है जबर्दस्त मांग
-पालकी और श्रृंगार के सामान भी खूब बिक रहे
सिमरन
नई दिल्ली। जन्माष्टमी के अवसर पर इस बार वृंदावन और मथुरा के पोशाक पहनकर लड्डू गोपाल सजेंगे। ऐसे में उनकी सुंदरता देखते ही बनेगी। कान्हा का क्रेज इस कदर है कि लोग उनकी पोशाक से लेकर पालकी समेत सभी श्रृंगार के सामान की खूब खरीदारी कर रहे है। जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आते ही राजनीति के बाजार लड्डू गोपाल के रंग में रंग चुके हैं। ऐसे में प्रमुख बाजारों से लेकर स्थानीय बाजार वृंदावन और मुरादाबाद के पोशाकों, झांकियों, मूर्तियों और सजावटी सामानों से पट गई हैं।
सबसे ज्यादा मांग कान्हा की रंग-बिरंगी मोती जड़ित पोशाकों की है, जो बच्चों को छोटे कृष्ण का रूप देने के लिए खरीदी जा रही हैं। इसके अलावा चमचमाती पालकियां, छोटी बांसुरियां और रंग-बिरंगे मोर पंखों को भी खरीदने के लिए लोग पहुंच रहे है। सदर बाजार, चांदनी चौक, करोल बाग, लाजपत नगर, लक्ष्मी नगर और द्वारका समेत अन्य बाजार और क्षेत्रीय बाजारों में बिकने वाला ज्यादातर सामान मथुरा, वृंदावन, जयपुर और बनारस से आता है। लड्डू गोपाल की पोशाकें इस बार सबसे ज्यादा बिक रही हैं। ऐसे में सदर बाजार में 0 से 10 साइज तक की पोशाकें उपलब्ध हैं, जो तीन पीस सेट में आती हैं, जिसमें ड्रेस, पगड़ी और माला का सेट मिलता है।
50 से 1500 तक है कीमत
रेशम, मखमल, नेट और सिल्क फैब्रिक में आने वाली इन पोशाकों की कीमत 50 से 1,500 रुपये तक है। डिजाइन में पारंपरिक जरी-गोटा वर्क, मिरर वर्क से लेकर मॉडर्न सीक्विन, बीड्स एम्ब्रॉयडरी और नए राधे-राधे प्रिंट वाली पोशाकें बाजार में छाई हुई हैं। ये पोशाकें रंगों में पीली, लाल, गुलाबी, नीली, संतरी और हरी रंगों में आती हैं, जो मोर पंख और बांसुरी की एम्ब्रॉयडरी से सजी होती हैं। इसके अलावा पगड़ियां भी साइज और स्टाइल के हिसाब से अलग-अलग मिल रही हैं, जिसमें छोटे बच्चों के कान्हा के लिए मिनी पगड़ी 30 रुपये की है, जबकि भारी जरी वाली पगड़ी 300 से 500 व अधिक रुपये तक बिक रही है।
मथुरा, जयपुर और बनारस से आ रहा माल
दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में बिक्री 20 प्रतिशत बढ़ी है, क्योंकि लोग घर पर झांकियां सजाने और बच्चों को तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। वहीं, झंडेवालान मंदिर बाजार के प्रेम ने बताया कि मथुरा और वृंदावन में पोशाक और मुकुट का काम महीनों पहले शुरू हो जाता है, जबकि जयपुर से जरी और गोटा वर्क का सामान आता है। वहीं, बनारस से खास सिल्क कपड़े और पगड़ी मंगाई जाती हैं।
फूलों सी महकेगी पालकी
जन्माष्टमी पर पालकी या झूले की झांकियों मुख्य हिस्सा हैं। ऐसे में फूलों से सजी पालकी, मीना काम वाली और मेटल लेग्स वाली थ्रोन्स डिजाइन में उपलब्ध हैं। इसमें छोटी, मध्यम और बड़ी साइज में ये तीन-चार प्रकारों में मिल रही हैं। नई डिजाइन वाली फूलों से सजी पालकी इस साल की स्पेशल आइटम है, जिसमें से फूलों की सुगंध भी आती है। इसकी कीमत 40 से दो हजार रुपये तक है। पटेल नगर के विक्रेता अमित ने बताया कि ये झूले बॉक्स पैकिंग में आते हैं, ताकि ट्रांसपोर्टेशन में डैमेज न हो।
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बांसुरी और मोर पंख की भी खूब बिक्री
वहीं, कान्हा की पहचान बांसुरी और मोर पंख की भी खूब बिक्री हो रही है। बांसुरी प्लास्टिक, लकड़ी और एम्ब्रॉयडरी वाली वैरायटी में मिल रही है, जो बच्चों के सेट्स में शामिल हैं। तीन प्रकार की बांसुरियां है, जिसमें छोटी, मध्यम और डेकोरेटिव वाले डिजाइन बाजार में उपलब्ध हैं। मोर पंख सिंगल, तीन पंखों वाले क्राउन में या अलग से छोटे-बड़े साइज में बिक रहे हैं। ऐसे में असली मोर पंख महंगे हैं, जबकि सिंथेटिक वाले सस्ते विकल्प हैं। इसकी कीमत 10 रुपये से शुरू होकर 500 रुपये तक है। लाइट और फूलों की मालाओं की कीमत 50 रुपये से शुरू होती है।