सोनभद्र। आजादी के 76 वर्षो के बाद भी सोनभद्र जिले के दुरुस्थ इलाकों के लिए आवागमन की सुगम व्यवस्था स्वप्न बना हुआ है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी क्लस्टर रुरल अर्बन मिशन के तहत भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को नहीं पाटा जा सका है।
इन इलाकों में कई धार्मिक स्थल एवं पर्यटन स्थल भी हैं। सड़कें चौड़ीकरण हो गई, मगर आवागमन सुगम नहीं हुआ। जिससे लोगों को असुविधा हो रही है। जिले के नगवां ब्लॉक अन्तर्गत आदिवासी बहुल पांच गांवों को श्यामा प्रसाद मुखर्जी क्लस्टर रुरल अर्बन मिशन (कोदई कलस्टर) में चयनित किया गया था। कोदई कलस्टर में पांच गांव शामिल हैं। इसमें चेरुई, वैजनाथ, कोदई, पल्हारी और मरकुड़ी गांव शामिल हैं। इसमें वैजनाथ, कोदई, पल्हारी और मरकुड़ी में 90 प्रतिशत आदिवासी समाज के लोग रहते हैं। जबकि चेरुई में आदिवासियों की संख्या करीब 70 प्रतिशत हैं।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी क्लस्टर रुरल अर्बन मिशन के तहत चयनित इन पांचों गांवों में विकास कार्य कराते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के बीच की खाई को पाटा जाना था और चयनित गांवों को परिवहन से जोड़ा जाना था। लेकिन हालत अभी भी जस की तस बनी हुई है।