आज के दौर में बच्चों को केवल किताबों की शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सोशल मीडिया का सुरक्षित और सकारात्मक उपयोग भी सिखाना जरूरी है, क्योंकि लगभग हर घर में स्मार्टफोन है और बच्चे रोजाना इसका इस्तेमाल करते हैं। यदि शुरुआत से ही उन्हें सही दिशा मिले, तो वे तकनीक का उपयोग सीखने और विकास के लिए कर सकते हैं। गर्मी की छुट्टियों के दौरान मैंने कक्षा पांच के विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया। प्रतिदिन उसी ग्रुप में गृहकार्य भेजा जाता था और बच्चे उसे पूरा कर उसकी फोटो साझा करते थे। रोज 50 से 60 प्रतिशत विद्यार्थी समय पर अपना कार्य भेजते थे। इससे छुट्टियों में भी उनकी पढ़ाई की निरंतरता बनी रही और सोशल मीडिया के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई। इस पहल से बच्चे दादी-नानी के घर रहते हुए भी पढ़ाई से जुड़े रहे। स्कूल खुलने पर उन्हें दोबारा पाठ्यक्रम से जोड़ने में भी किसी तरह की कठिनाई नहीं हुई। मेरा मानना है कि यदि तकनीक का सही मार्गदर्शन के साथ उपयोग कराया जाए तो यह बच्चों की शिक्षा को और प्रभावी बना सकती है।
- अनामिका शर्मा, शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय, नगला बंजारा, जेवर