बहराइच/बिछिया। कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य इस वर्ष निर्धारित समय से 15 दिन पहले ही पर्यटकों के लिए 1 नवंबर को खोला जा रहा है। वन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं, लेकिन नेपाल सीमा से होकर बहने वाली गेरुआ नदी में पानी न होने के कारण शुरुआती दौर में पर्यटकों को बोटिंग की सुविधा नहीं मिल पाएगी।
अभी घाघरा घाट बैराज के सभी गेट साफ-सफाई कार्य के लिए पूरी तरह खुले हैं, जिस कारण कतर्नियाघाट रेंज के बीच से होकर बहने वाली गेरुआ नदी का अधिकांश हिस्सा सूख गया है। घाघराघाट बैराज के अभियंताओं के अनुसार 7 नवंबर को बैराज क्लोजर का काम पूरा होने के बाद गेरुआ नदी में पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद ही नाव (बोट) संचालन शुरू हो सकेगा।
ऐसे में पर्यटन सीजन का शुरुआती एक सप्ताह बिना बोटिंग के ही गुजरेगा। हालांकि जंगल सफारी का आनंद पर्यटक ले सकेंगे। कतर्नियाघाट रेंज के वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने बताया कि अन्य व्यवस्थाएं विभाग कर ली गई हैं। जैसे ही नदी में जलभराव शुरू होगा, नौकायन एवं वोटिंग की व्यवस्थाएं पर्यटकों को मुहैया कराई जाएंगी।
कतर्नियाघाट में यह रहेगा प्रतिबंधित
डीएफओ सूरज कुमार ने बताया कि कतर्नियाघाट आने वाले पर्यटक अपने साथ कोई भी हथियार नहीं ला सकेंगे। हथियार मिलने पर वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
प्लास्टिक लाने पर रहेगी रोक
पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभाग ने इस बार विशेष सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है। जंगल क्षेत्र में भ्रमण के दौरान पर्यटकों द्वारा प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, पाउच, थर्मोकोल या अन्य अपशिष्ट फेंकना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उल्लंघन की स्थिति में स्पॉट फाइन (तत्काल जुर्माना) भी लगाया जाएगा।
डीएफओ का कहना है कि प्लास्टिक कचरा जंगली जानवरों एवं नदी के जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा बनता है। इसलिए इस बार सख्त निगरानी की जाएगी और गाइडों को भी अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है कि पर्यटक भ्रमण के दौरान स्वच्छता के सभी नियमों का पालन करें।
ठहरने और बुकिंग की सुविधा
डीएफओ ने बताया कि कतर्नियाघाट, मोतीपुर और ककरहा रेंज में पर्यटकों के लिए थारू हट और कैंपिंग की व्यवस्था की गई है। सभी आवासीय सुविधाओं के लिए ऑनलाइन बुकिंग www.upecotourism.in पर की जा सकती है।