-जम्मू-कश्मीर के स्टॉल पर उमड़ रही जबर्दस्त भीड़
-शॉल, जैकेट और कश्मीरी सूट बने पहली पसंद
-संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में जारी स्पेशल हैंडलूम एक्सपो सूत्रों का सफर रविवार को अपने तीसरे दिन भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। प्रदर्शनी में इस बार सबसे अधिक चर्चा जम्मू-कश्मीर से आए बुनकरों और कलाकारों के स्टॉल की रही, जहां पशमीना शॉल, जैकेट और कश्मीरी सूट लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
जम्मू से आए कारीगर सरदाज अहमद ने बताया कि वे सातवीं कक्षा से बुनाई का काम कर रहे हैं और यह कला उन्होंने अपने पिता से सीखी है। सरदाज के अनुसार, असली पशमीना की बुनाई एक सूक्ष्म और धैर्य पूर्ण प्रक्रिया है । एक खूबसूरत पशमीना शॉल तैयार करने में कलाकारों को कई महीनों तक मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर वह अपनी पूरी चमक और मुलायमपन के साथ तैयार होती है। दर्शकों ने भी बताया कि कश्मीरी पशमीना की बनावट और उसकी कोमलता छूने भर से उसका असली मूल्य समझ में आता है। लोग न केवल कपड़े खरीद रहे हैं, बल्कि कलाकारों से बुनाई की तकनीक और डिजाइन की बारीकियां भी जान रहे हैं।
वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) और राष्ट्रीय डिजाइन केंद्र के सहयोग से आयोजित यह प्रदर्शनी देशभर के पारंपरिक हथकरघा और हस्तनिर्मित वस्त्रों की झलक पेश कर रही है। सूत्रों का सफर में देशभर के 75 बुनकर, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) और सहकारी समितियां अपने पारंपरिक वस्त्रों की प्रदर्शनी लगा रही हैं। आंध्र प्रदेश, बिहार, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और कश्मीर जैसे राज्यों से आए कलाकार अपनी क्षेत्रीय कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें साड़ियाँ, सूट-दुपट्टे, धोती, कुर्ते, होम फर्निशिंग और सजावटी वस्त्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। आयोजकों का कहना है कि यह प्रदर्शनी 16 अक्टूबर तक हर दिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक जनपथ के हैंडलूम हाट में चलती रहेगी।