संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पांच दिवसीय राज्यस्तरीय कपालमोचन मेला एक नवंबर से शुरू होगा। इसके बावजूद मेले की तैयारियां कछुआ गति से चल रही हैं। मेला क्षेत्र में न तो साफ सफाई हुई है और न ही सड़कों की ठीक से मरम्मत। तैयारियों के लिए जो काम हो रहे हैं उनमें भी ठेकेदार द्वारा खानापूर्ति की जा रही है।
मेला में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जो अस्थायी शौचालय बनाए जा रहे हैं उनके नीचे मात्र चार इंच चौड़ा आधे से एक फीट का गड्ढा है। कहां तो मेले में सात से आठ लाख श्रद्धालु आएंगे और कहां उनके लिए शौचालय के नीचे आधा फीट का गड्ढा बनाया जा रहा है। यह हाल राजकीय स्कूल अहड़वाला के पास बन रहे शौचालयों का है। भीड़ से बचने के लिए कपालमोचन में श्रद्धालु पहले ही आने लगे हैं, लेकिन शौचालय न बनने से वह परेशान हैं।
मेला परिसर में जहां पर दुकानें लगनी हैं वहां अभी भी साफ सफाई नहीं की गई है। मिट्टी उबड़ खाबड़ है। कई जगह जेसीबी से खोदाई करके एक जगह ही मिट्टी के ढेर लगा दिए गए हैं। टैंट लगाने वाले कर्मचारियों ने बताया कि मेला में सफाई करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। जब सफाई होगी तभी वह दुकानों के टैंट लगा पाएंगे।
अभी न तो जगह की सफाई हुई है और न ही दुकानों वाली जगह को ठीक से समतल किया गया है। जिस जेसीबी चालक की ड्यूटी लगाई गई थी वह केवल खानापूर्ति कर रहा है। मेला परिसर के अंदर सड़कों का भी बुरा हाल है। मछरौली रोड पर श्री गुरु रविदास मंदिर के सामने से जो सड़क गुरुद्वारा साहिब की तरफ जाती है वह टूटी पड़ी है। टाइलें उखड़ी हुई हैं। इसी तरह मेला की एंट्री पर ही शहीद उधम सिंह की प्रतिमा के सामने सड़क निर्माण के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई। सड़क को ठीक से नहीं बनाया गया। यहां पर रेत ही रेत बिखरा पड़ा है। मेला क्षेत्र में हर तरफ कूड़ा ही कूड़ा दिखाई दे रहा है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। सूरजकुंड सरोवर को जाने वाली पर जहां बल्लियां लगाई गई है उसके पास भी जगह ऊंची-नीची है।
मेला क्षेत्र में पीने के पानी का भी अभी तक प्रबंध नहीं हो पाया है। पानी पीने के लिए जो नल लगाए गए हैं वह ज्यादातर बंद पड़े हैं। जो चल रहे हैं उनके पास गंदगी का आलम है। मेला में दुकान लगाने वाले जयपाल, रमेश ने बताया कि इस बार मेला की तैयारी काफी ढीली चल रही है। काम कुछ भी नहीं हुआ और समय कम बचा है। पीने के लिए पर्याप्त पानी भी नहीं है। सड़कों किनारे पर जो नल लगाए गए थे वह बंद पड़े हैं। मजबूरन धर्मशाला व मंदिरों में से पानी लेना पड़ रहा है।
कपालमोचन मेले में लाइट का प्रबंध करते कर्मचारी। संवाद
कपालमोचन मेले में लाइट का प्रबंध करते कर्मचारी। संवाद
कपालमोचन मेले में लाइट का प्रबंध करते कर्मचारी। संवाद
कपालमोचन मेले में लाइट का प्रबंध करते कर्मचारी। संवाद
कपालमोचन मेले में लाइट का प्रबंध करते कर्मचारी। संवाद
कपालमोचन मेले में लाइट का प्रबंध करते कर्मचारी। संवाद