संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बस, ट्रक, कार, ऑटो, ई-रिक्शा जिस पर देखो उसी में सवार होकर श्रद्धालु तीर्थराज कपालमोचन की धरती पर पहुंच रहे हैं। मेला में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती ही जा रही है। मेला में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला निरंतर जारी है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के वाहनों की कतार लगी रही। श्रद्धालु एक सरोवर में स्नान कर दूसरे सरोवर तक पहुंच रहे हैं। कार्तिक मास में दीपदान का बहुत अधिक महत्व है।
इसीलिए अधिकतर श्रद्धालु सरोवर में स्नान कर सरोवर किनारे, गुरुद्वारा व मंदिर के सामने दीप दान कर रहे हैं। जो बुजुर्ग ठीक चल पाने में असमर्थ हैं वह भी लाठी व डंडे का सहारा लेकर मेला में आ रहे हैं। इसी से उनकी आस्था का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। मेला में रात तक डेढ़ लाख श्रद्धालु कपालमोचन में पहुंच चुके थे।
मेला में गोहाना निवासी बलजीत की ओर से बनाया गया जलेब भी श्रद्धालुओं को खूब पसंद आ रहा है। उनके द्वारा बनाया गया जलेब पूरे भारत में मशहूर है। उनके द्वारा बनाई गई जलेबी को सभी दलों के बड़े-बड़े राजनेताओं ने चखा व सराहा है।
इस साल मेला में उसके साथ जलेबी बनाने वाले आठ कारीगर आए हैं। बलजीत ने बताया कि उनके जलेब में न कोई रंग होता है और न कोई मसाला। यह जलेब 20 दिन तक खराब नहीं होती। एक जलेब का वजन 250 ग्राम है।
बच्चे व बड़े ले रहे झूलों का आनंद
कपालमोचन मेला क्षेत्र में हर बार श्रद्धालुओं व बच्चों के मनोरंजन के लिए झूल व मनोरंजन के साधान उपलब्ध करवाए जाते है। इस बार बच्चों व बड़ों के लिए 35 प्रकार के झूले व दर्जन भर मनाेरंजन के साधान लगाए गए है। इस बार झूलों को पहले दिन से ही चला दिया गया है। करीब छह एकड़ में फैले झूला क्षेत्र में सबसे अधिक भीड़ नजर आ रही है। ठेकेदार अमित कुमार ने बताया कि झूलों में सुरक्षा के सभी प्रबंधन किए गए है। रात के समय झूलों को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है। रात के समय रोशनी के साथ चलते आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए छोटे झूले व अन्य खेल लगाए गए है।
रात में रोशनी से जगमगा रहा कपालमोचन
कार्तिक पूर्णिमा के इस मेले में जब दीपदान से सरोवर जगमगाता है, तो आस्था, परंपरा और विश्वास का यह संगम कपालमोचन को सचमुच मोक्ष धाम बना देता है। रात्रि के समय मेला ओर भी आकर्षक हो जाता है जब धार्मिक स्थल और मंदिर एलईडी लाइटों से जगमग होते हैं। मेला हिंदू सिख एकता का प्रतीक हैं। कपालमोचन सरोवर के पानी में जब रंग बिरंगी रोशनी से सजे गुरुद्वारा साहिब का प्रतिबिंब चमकता है तो हर कोई देखता रह जाता है।
30 रुपये में बिक रही पराली की गठड़ी
किसान जिस पराली को खेत में बेकार की वस्तु समझकर जला रहे हैं उसी को बाहर से आए श्रद्धालु 30 रुपये के हिसाब से खरीद रहे है। पंजाब व अन्य प्रदेशों से आए श्रद्धालु यहां पवित्र सरोवरों में स्नान के बाद तंबुओं में ठहरते हैं। खेतों की ठंड व गीली मिट्टी से बचने के लिए वह तंबुओं में पराली का बिछौना लगाते हैं। मेला में काफी लोग पराली बेचते हैं। लुधियाना से आए बलकार सिंह ने बताया कि पराली की तीन छोटी पुली 10 रुपये की हैं। एक गठड़ी में नौ पुली हैं। इसलिए 30 रुपये की मिल रही है।
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद
कपालमोचन स्थित ऋणमोचन सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। संवाद