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कंडुवा रोग : विशेषज्ञ की सलाह पर करें दवा का छिड़काव

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मौसम में परिवर्तन के बीच धान की फसल में कंडुवा रोग (फसल में पीलेपन की समस्या) लगने की आशंका बढ़ गई है। फसलों में यह समस्या धान के पकने के बाद होती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से फसलों के विशेष देखभाल की अपील की है। मौसम विभाग ने भी कंडुवा रोग से बचाव के लिए बृहस्पतिवार को एडवाइजरी जारी किया। जिले में 52 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई है। इस समय विभिन्न क्षेत्रों में धान की फसल में कंडुवा रोग, फाल्स स्मट का प्रभाव देखा जा रहा है। इस रोग के लगते ही धान की बालियों के दानों की जगह पीले या हरे रंग के गोल गेंद बना लेते हैं। यह बाद में काले हो जाते हैं। जिससे फसल की पैदावार पर 50 फीसदी तक प्रभावित होती है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां औराई के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. विश्वेंदु द्विवेदी ने बताया यदि बीज शोधन नहीं हुआ है, तो खड़ी फसल में फफूंदनाशी का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो पूरी की पूरी फसल नष्ट हो जाती है। मौसम में परिवर्तन, नाइट्रोजन की अधिक मात्रा में इस्तेमाल करने, बीज उपचार न करने, उचित उर्वरक प्रबंधन न करने के कारण होता है। फसल में 50 फीसदी बालियां निकल चुकी होती है, तब एक फफूंदनाशी का छिड़काव जरूरी होता है। विशेषज्ञ की सलाह पर दवा का छिड़काव करना चाहिए। कृषि विशेषज्ञ डॉ. आरपी चौधरी ने बताया कि किसानों को फसल पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड दो ग्राम प्रति लीटर पानी में या टैबुकोनाजोल, प्रोपीकोनाजोल एक ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। दोबारा सात से 10 दिन बाद पुनः दवा का छिड़काव करना चाहिए। जैविक नियंत्रण के लिए नीम के पत्तों को पानी में उबालकर घोल बनाकर फंफूद फैलने वाले क्षेत्र में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। बारिश भी इस रोग को फैलाने में काफी मदद करती है।
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