जेपी की अधूरे निर्माण पूरे करने को 3250 करोड़ निवेश करेगा सुरक्षा समूह
- एनसीएलटी में पेश किया समाधान योजना, साढ़े तीन से चार वर्ष में 20 हजार खरीदारों को मिलेगा आशियाना
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250 टावर अधूरे हैं जेपी इंफ्राटेक के नोएडा व ग्रेनो में
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मुंबई का सुरक्षा समूह नोएडा-ग्रेटर नोएडा समेत अन्य स्थानों पर जेपी इंफ्राटेक की अधूरी परियोजनाओं का काम पूरा करने के लिए 3250 करोड़ का निवेश करेगा। समूह की ओर से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में दिए गए समाधान योजना में इसका जिक्र किया गया है। एनसीएलटी ने मंगलवार को समाधान योजना पर मुहर लगा दी है। ऐसे में जेपी की परियोजना के टेकओवर का रास्ता साफ हो गया है। करीब तीन माह जेपी की अधूरी परियोजनाओं में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में जेपी इंफ्राटेक के 250 टावर अधूरे हैं। जिसमे करीब 20 हजार से अधिक फ्लैट खरीदारों के पैसे फंसे हैं। योजना के मुताबिक सभी खरीदारों को 3.5 से 4 वर्ष में अपने सपनों का आशियाना मिल जाएगा।
समाधान योजना में बताया गया है कि समूह 125 करोड़ रुपये अपनी खुद की इक्विटी का निवेश करेगा। वहीं समूह की दूसरी कंपनियां 125 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। वहीं 3000 करोड़ की राशि कर्ज या दूसरे माध्यमों से जुटाई जाएंगी। समूह ने कर्ज चुकाने की योजना का ब्यौरा दिया है। इसके अलावा अन्य माध्यमों से कंपनी 7479 करोड़ रुपये जुटाएगी। इसमें जेपी की कंपनी और टोल कंपनी से लिए जाने वाले पैसे शामिल होंगे। समूह की ओर से पांच वर्ष की योजना तैयार की गई है। योजना के मुताबिक पहले वर्ष 5057 करोड़ जुटाए जाएंगे। इसमें 3250 करोड़ कंपनी खुद ही लगाएगी। वहीं 1462 करोड़ जेपी की परियोजना से जुटाया जाएगा। संभव है कि इसमें फ्लैट खरीदारों से बकाया मांगा जाए या अन्य किसी स्रोत से इसे निकाला जाए। इसके अलावा 345 करोड़ रुपये यमुना टोल से लिया जाएगा। योजना के मुताबिक दूसरे वर्ष जेपी की परियोजना और टोल से 1612 करोड़, तीसरे वर्ष 1567 करोड़, चौथे वर्ष 1506 करोड़ और पांचवें वर्ष 986 करोड़ जुटाया जाएगा। पहले वर्ष 2473 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दूसरे वर्ष 2489 करोड़, तीसरे वर्ष 2515 करोड़, चौथे वर्ष 2097 करोड़ और पांचवें वर्ष 1026 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है।
नई परियोजनाओं से जुटाए जाएंगे 1500 करोड़
सुरक्षा समूह ने नई परियोजनाओं की लांचिंग से 1500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बताई है। हालांकि सूत्रों की मानें तो नई परियोजनाओं की लांचिंग संभव नहीं है। ऐसे में जेपी की खाली जमीन से धनराशि जुटाने की बात कही जा रही है। हालांकि अभी इस मामले में स्थिति और स्पष्ट होनी बाकी है।
निर्माण और रिफंड पर खर्च होंगे 5946 करोड़
योजना के मुताबिक जेपी की परियोजनाओं के अधूरे निर्माण पूरे करने और फ्लैट खरीदारों के रिफंड पर 5946 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें पहले वर्ष 2029 करोड़, दूसरे वर्ष 2061 करोड़, तीसरे वर्ष 1092 करोड़ और चौथे वर्ष 794 करोड़ खर्च करने की योजना है। इस पैसे से निर्माण का काम भी पूरा होगा। वहीं जिन खरीदारों ने अपने पैसे वापसी का आवेदन किया है। उनके पैसे भी वापस हो जाएंगे। समूह की ओर से अलग-अलग लोन का ब्याज भी चुकाएगा। यह कुल 1123 करोड़ रुपये होगी।
9873 करोड़ के बदले 7737 करोड़ की जमीन और ऋणपत्र
जेपी इंफ्राटेक के अलग-अलग कर्जदाताओंं ने 9783 करोड़ रुपये का क्लेम किया है। सुरक्षा समूह की ओर से इनको 1280 करोड़ का ऋणपत्र और 6457 करोड़ की 2550 करोड़ जमीन देने का वादा किया है। ऋणपत्र को एक तय समयावधि में भुनाया जा सकेगा।
यह है जेपी का मामला
नोएडा सेक्टर-128, 132, 151, फॉर्मूला वन रेस के पास, टप्पल और आगरा में जेपी की कई परियोजनाएं हैं। जेपी इंफ्राटेक की परियोजनाओं के खिलाफ 2017 से दिवालिया प्रक्रिया जारी है। एनसीएलटी की ओर से अनुज जैन को इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने छह साल के लंबे अंतराल के बाद मुंबई की सुरक्षा समूह के समाधान योजना पर मुहर लगाई है। ऐसे में अब कंपनी की ओर से जेपी की परियोजना के टेकओवर की प्रक्रिया शुरू होगी। वहीं अधूरे निर्माण पूरे करने के लिए फंड जुटाने और कर्जदाताओं को पैसे लौटाने का काम शुरू होगा।