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Noida News: 6 माह में जानवरों के काटने के 8 हजार मामले, कुत्तों से ज्यादा बिल्लियों ने काटा

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श्रीनगर। मध्य कश्मीर के श्रीनगर जिले के श्री महाराजा हरि सिंह (एसएमएचएस) अस्पताल के एंटी-रेबीज क्लीनिक (एआरसी) में पिछले छह महीनों में 8,000 से ज्यादा जानवरों के काटने के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें ज्यादातर कुत्ते और बिल्लियों के काटने के मामले शामिल हैं।
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चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार शहर के हर कोने में आवारा कुत्तों की बढ़ती मौजूदगी के कारण इंसानों और कुत्तों के बीच टकराव बढ़ गया है जिसके परिणामस्वरूप कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। डॉक्टरों ने आगे कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से ज़्यादा घरों में बिल्लियों को पालतू जानवर के रूप में रखा जा रहा है जिससे बिल्लियों के काटने के मामलों में वृद्धि हुई है और वास्तव में कुत्तों के काटने के मामलों की संख्या भी बढ़ गई है।
एसएमएचएस में एआरसी के एक अधिकारी ने बताया कि 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के बीच कुल 12,437 काटने के मामले सामने आए। इनमें से 6,205 कुत्ते के काटने के जबकि 5,717 बिल्ली के काटने के और 515 अन्य जानवरों के काटने के मामले थे। 1 अप्रैल से 26 सितंबर, 2025 तक 8,346 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इस अवधि में कुत्ते के काटने के 3,799 मामले, बिल्ली के काटने के 4,394 मामले और अन्य जानवरों से जुड़े 153 मामले सामने आए हैं। अगर यही सिलसिला जारी रहा तो अधिकारियों का अनुमान है कि मार्च 2026 के अंत तक कुल मामलों की संख्या लगभग 15,000 तक पहुंच सकती है।
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वार्षिक आंकड़ों की समीक्षा करते हुए अधिकारी ने कहा कि अप्रैल 2015 से मार्च 2016 तक 7,061 काटने के मामले सामने आए। अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक 5,832 मामले, अप्रैल 2017 से मार्च 2018 तक 6,802 मामले, अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक 6,397 मामले, अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक 6,139 मामले, अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक 4,808, अप्रैल 2021 से मार्च 2022 तक 5,469, अप्रैल 2022 से मार्च 2023 तक 6,875, अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक 8,652, और अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक यह संख्या 12,437 तक पहुंच गई।
अप्रैल 2015 से अब तक एआरसी में कुल मिलाकर लगभग 80,000 पशु काटने के मामले दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि बिल्लियों को पालतू जानवर के रूप में रखने के कारण बिल्लियों के काटने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हो रही है जबकि ज़्यादातर कुत्तों के काटने की घटनाएं आवारा जानवरों के कारण होती हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि कश्मीर में कुत्तों के काटने की घटनाएं एक जन स्वास्थ्य समस्या बनी हुई हैं और कई पीड़ितों में रेबीज विकसित हो जाता है - एक घातक वायरल बीमारी जो दुनिया भर में हर साल लगभग 59,000 लोगों की मौत का कारण बनती है खासकर अफ्रीका और एशिया में। जानवरों के काटने के बाद समय पर टीकाकरण ही इसकी रोकथाम का प्राथमिक उपाय है।
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