ग्रेटर नोएडा। करोड़ों की लागत से बने ग्रेटर नोएडा व नोएडा के स्टेडियमों में एस्ट्रो टर्फ तो दूर, घास तक के मैदान नहीं है। खिलाड़ियों का कहना है कि एस्ट्रो टर्फ न होना तो ठीक है लेकिन घास वाला मैदान भी न होने से दिक्कत हो रही है। ऐसे में जिले से राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की हॉकी प्रतिभाएं सिमट जाती हैं। दरअसल, हर खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारियों के लिए दिल्ली व अन्य राज्यों में नहीं जा पाता है।
नोएडा व ग्रेटर नोएडा में पांच से छह स्टेडियम हैं। इनमें हॉकी के लिए घास तक के मैदान नहीं हैं। खेल निदेशालय की ओर से होने वाले ट्रायल व प्रतियोगिताएं तक निजी स्कूलों के मैदानों में करानी पड़ती हैं।
धूल फांक रहे उपकरण
ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित मलकपुर स्पोर्ट्स स्टेडियम में बीते वर्ष शासन की ओर से जिले की प्रतिभाओं को निखारने के लिए हॉकी के उपकरण भेज गए थे। ये बंद कमरे में रखे-रखे धूल फांक रहे हैं। करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी स्टेडियम में उप जिला क्रीड़ा व जिला क्रीड़ा अधिकारी नियुक्ति नहीं हुई है।
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जिले में एक भी हॉकी स्टेडियम नहीं है। सेक्टर-37 स्थित स्पोर्ट्स जोनल में हॉकी स्टेडियम की योजना अभी तक फाइलों व नक्शे से निकल कर धरातल पर नहीं उतर सकी है। - अफजल अहमद, पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी व कोच
सीबीएसई क्लस्टर हॉकी प्रतियोगिता में स्कूल स्तर तक भाग लिया। जिले में मैदान की कमी होने के कारण उन्हें खेल से दूरी बनानी पड़ी। सुविधाओं के अभाव में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का सपना अधूरा रह गया। -उमेश कौशिक, हॉकी खिलाड़ी
जिले में हॉकी मैदान न कोच होने के कारण कर्नाटक राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया है। अभी तैयारी के लिए दिल्ली या बंगलुरू जाना होता है। सपना देश के लिए पदक जीतना है। - धनंजय सिंह, हॉकी खिलाड़ी।
काफी समय से हॉकी मैदान की मांग की जा रही थी। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-37 स्थित जोनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मैदान बनाने की अनुमित मिली है। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से जल्द ही टेंडर पास किए जाएंगे। - मनजीत सिंह, पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी व जिला हॉकी एसोसिएशन के सचिव