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Noida News: आईजीआई के बदले गाजियाबाद से नोएडा एयरपोर्ट जाना ज्यादा खर्चीला

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-कॉमर्शियल फ्लाइट की घोषणा लेकिन यातायात व्यवस्था नहीं, महंगी कैब ही एकमात्र रास्ता
संदीप वर्मा
यमुना सिटी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 15 जून से कॉमर्शियल हवाई यात्रा का संचालन तो शुरू होने जा रहा है, लेकिन दिल्ली के मुकाबले मेट्रो, सिटी बस या अन्य परिवहन व्यवस्था सृदृढ़ न होने के चलते महंगा किराया यात्रियों की जेब अधिक ढीली करेगा। इसके चलते ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गाजियाबाद और नोएडा से सटे दिल्ली के क्षेत्रों से नोएडा एयरपोर्ट के बजाए आईजीआई जाना कम खर्चीला है।

नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का लोकापर्ण 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसके बाद अब 15 जून से विमानन कंपनी इंडिगो कॉमर्शियल फ्लाइटों का संचालन करने जा रही है लेकिन अब तक बेहतर ट्रांसपोर्ट न होना यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा। हालांकि, एनआईए से यूपी रोडवेज, दिल्ली परिवहन समेत अन्य विभागों से अनुबंध हुआ है। साथ ही फ्लाइट उड़ानों के साथ कैब संचालन के लिए भी अनुबंध हुए हैं लेकिन अब तक यह सेवाएं धरातल पर नहीं उतरीं हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए महंगी कैब ही यातायात का जरिया है।
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मेट्रो और सिटी बस सेवा उपलब्ध न होने पर अब तक यात्री कैब सुविधा के भरोसे हैं। गाजियाबाद के राज नगर से जहां आईजीआई तक जाने में ऊबर और ओला का किराया करीब 850 रुपये से 900 रुपये है। वहीं, कविनगर से नोएडा एयरपोर्ट तक किराया लगभग 1200 रुपये है। राज नगर से नोएडा एयरपोर्ट लगभग 77 किलोमीटर है, जबकि आईजीआई 51 किलोमीटर ही है।
नोएडा के सेक्टर-62 से आईजीआई एयरपोर्ट का कैब किराया लगभग 800 रुपये है। वहीं, सेक्टर-62 से नोएडा एयरपोर्ट तक किराया लगभग 900 रुपये है। सेक्टर-62 से नोएडा एयरपोर्ट 74 किलोमीटर है, जबकि आईजीआई 40 किलोमीटर है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित गौड़ सिटी से आईजीआई एयरपोर्ट और नोएडा एयरपोर्ट तक समान किराया लगभग 800 रुपये से 900 रुपये तक होगा। गौड़ सिटी से नोएडा एयरपोर्ट लगभग 65 किलोमीटर है, जबकि आईजीआई 46 किलोमीटर है।
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कार्गो से भी सामान ले जाने की नहीं बनी रोड
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए अभी केवल यमुना एक्सप्रेस-वे ही एकमात्र रास्ता है। जबकि 60 मीटर चौड़ी वीआईपी रोड अभी दयानतपुर के आगे बनी ही नहीं है। इसके अलावा अभी तक कार्गो रोड केवल 8 किलोमीटर बनी है। यह लगभग दो किलोमीटर की रोड बननी है। ऐसे में कार्गो का सामान भी जाना केवल जेवर के पतले रास्ते से हो सकेगा।

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