-पांचवें विश्व पर्यावरण समिट में शामिल हुए कृषि एवं कल्याण राज्य मंत्री
-कहा, कई सम्मेलनों में महत्वपूर्ण विचार आए, परंतु नहीं हुआ उन पर अमल
-डॉ अंबेडकर कॉलेज की ओर से आयोजित हुआ तीन दिवसीय कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। युवाओं को पर्यावरण के प्रति सजग किया जाना जरूरी है। पर्यावरण को लेकर वर्ष 1952 से अब तक कई सम्मेलन हुए हैं, जिनमें विविध विचार आए, लेकिन उन पर अब तक अमल नहीं किया गया। कृषि एवं कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने यह बातें डॉ भीम राव अंबेडकर कॉलेज की ओर से आयोजित तीन दिवसीय (16 से 18 नवंबर) पांचवें विश्व पर्यावरण समिट के शुभारंभ के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
एनवायरमेंट एंड सोशल डेवलपमेंट एसोसिएशन एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समिट में वक्ताओं ने कहा कि प्राण देने वाली वायु ही आज प्राण निगल रही है। राज्य मंत्री ठाकुर ने प्रस्ताव रखा कि लोग आसपास के गांवों में जाएं व किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करें। समिट के पहले दिन कई पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों ने पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति व कृषि पर अपने विचार व्यक्त किए। पर्यावरण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने के लिए वक्ताओं को विशेष रूप से सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में डा भीमराव अंबेडकर कॉलेज के प्राचार्य प्रो सदानंद प्रसाद सहित ईएसडीए के अध्यक्ष मेजर जनरल डॉ श्रीपाल और मुख्य वक्ता पद्मभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी सहित अन्य अतिथियों ने अपने अनुभवों को साझा किया। प्रो सदानंद ने कहा कि हमारे जीवन का आधार ही पर्यावरण है। जिसके दूषित होने से कई तरह की नई बीमारियों का जन्म हो रहा है। पद्म भूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि न्यूयॉर्क से नई दिल्ली तक की हवा बदल गई है। प्राण वायु ही आज प्राण निगल रही है। ईएसडीए के अध्यक्ष मेजर जनरल डॉ. श्रीपाल ने वैज्ञानिकों के पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए कई वैज्ञानिक तथ्यों को रखा। मालदीव के राज्य मंत्री डॉ अमज़थ अहमद ने भी युवाओं को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।