मेडिकल कॉलेजों में दाखिले नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, तीन आरोपी गिरफ्तार
नोएडा। क्रैक योर करियर कंपनी के अधिकारी संजीव रावत उर्फ ऋषि की हत्या की जांच कर रही नोएडा पुलिस ने हत्या का खुलासा करते हुए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह के तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। चार आरोपी फरार हैं। ऋषि भी इस गिरोह से जुड़ा हुआ था। जब ऋषि ने दाखिले के नाम पर लिए गए पैसों में अधिक हिस्से की मांग की तो 8 सितंबर की रात आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी और एक्सप्रेसवे के पास फेंक दिया था। कोतवाली एक्सप्रेसवे पुलिस ने जांच के बाद नीरज सिंह उर्फ हरेंद्र, निखिल उर्फ समीर और धीरेंद्र उर्फ सोनल सिंह को मंगलवार देर रात एक्सप्रेसवे के पास से गिरफ्तार कर लिया और अनवर उर्फ मसरूल हक, विकास, राजेश व अभिषेक फरार हैं। गिरोह का सरगना नीरज सिंह हैं।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि यह सात लोगों का संगठित गिरोह है। आरोपियों ने देश के कई शहरों में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के नाम पर कंपनी व दफ्तर खोल रखे हैं। यहां नीट की परीक्षा में बैठने वाले छात्र-छात्राओं का डाटा इकट्ठा कर उनसे संपर्क किया जाता है और मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। पैसे लेने के बाद ये आरोपी दफ्तर बंद कर भाग जाते थे। सरगना नीरज ऐसी ही फर्जी कंपनी क्रैक योर करियर नोएडा व दिल्ली में चला रहा था। एक साल से संजीव इसी कंपनी में काम कर रहा था। संजीव की अंग्रेजी अच्छी थी इस कारण वह काफी छात्र-छात्राओं को मेडिकल में दाखिले के नाम पर कंपनी बुला लेता था। इससे कंपनी की कमाई बढ़ गई थी। संजीव को नीरज के इस काले कारनामे का पता भी चल चुका था। इस पर संजीव ने नीरज व अन्य लोगों से अपना हिस्सा बढ़ाने के लिए कहा और नहीं बढ़ाने पर पोल खोलने की बात कही। इसके बाद नीरज व उसके साथियों ने हत्या की योजना बनाई और 8 सितंबर की रात को सातों आरोपियों ने संजीव के साथ पार्टी की। इसके बाद संजीव को एक्सप्रेसवे पर ले गए और कार से कुचलकर शव को छोड़ दिया था। 9 सितंबर को पुलिस ने शव बरामद किया था। करीब एक सप्ताह के बाद संजीव की पहचान हुई थी।
एमबीए पास ने ऐसे बना गिरोह
गिरोह सरगना नीरज ने 2013 में बंगलूरू से एमबीए किया और सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी की। परीक्षा में जब वह सफल नहीं हुआ तो 2014 में दिल्ली के धीरेंद्र शर्मा के साथ मिलकर रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने लगा। इस मामले में दोनों तिहाड़ जेल भी गए। जेल से बाहर आने के बाद दिल्ली के मुखर्जी नगर में पीजी चलाया, लेकिन यहां पैसे की कम कमाई हुई तो मेडिकल कॉलेज में दाखिले के नाम पर फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया। इसी दौरान दक्षिण भारत में मेडिकल छात्रों को दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले पटना निवासी अनवर उर्फ मसरूल हक के संपर्क में आ गया। इसके बाद से यह गिरोह नीट में शामिल होने वाले असफल छात्रों का डेटा निकालकर उन्हें सीधे दाखिला दिलाने के नाम पर प्रत्येक से 4-5 लाख रुपये ठगने लगा। धीरे-धीरे कई राज्यों में नेटवर्क बना लिया और नोएडा, दिल्ली सहित करीब एक दर्जन शहरों में दफ्तर खोल लिया।
एक साल से जुड़ा था संजीव
पुलिस का कहना है कि संजीव पहले कॉल सेंटर में काम करता था। पिछले साल वह इस गिरोह के साथ जुड़ गया था। नीरज ने पिछले साल नोएडा सेक्टर-62 में ग्लोबल कैरियर के नाम से फर्जी दफ्तर खोला था। इसी दौरान नीरज के साथ संजीव संपर्क में आया। संजीव के साथ आने के बाद कंपनी की कमाई बढ़ गई। इससे नीरज का भरोसा संजीव पर बढ़ गया और उसे कंपनी की तरफ से कार दी गई। मार्च 2019 में नीरज की शादी औरंगाबाद, बिहार में हुई थी। संजीव अपने साथ बिहार ले गया था और 15 दिन साथ रखा था। इसके बाद नोएडा लौटने के बाद इन्होंने सेक्टर-4 स्थित में क्रेक योर करियर नाम से ऑफिस शुरू किया था। यहां पर पूरा गिरोह काम करने लगा था। संजीव ने कंपनी के सभी कर्मचारियों के असली नाम व उनके पते को पेन ड्राइव में रख लिया था। इस वर्ष सितंबर के पहले सप्ताह में मेडिकल में दाखिला कराने के नाम पर 65 लाख रुपये जुटा लिए। सभी लोग ऑफिस बंद कर भागने की तैयारी में थे। संजीव ने इसमें से 35 लाख रुपये की मांग की। पैसे नहीं देने पर पुलिस को बताने की चेतावनी दी। इसके बाद ही नीरज व उसके साथियों ने मिलकर हत्या कर दी।
पिछले साल भी इस गिरोह ने पटना में की थी हत्या
एसएसपी ने बताया कि वर्ष 2018 में जब नीरज एंड कंपनी का ऑफिस सेक्टर-62 में चल रहा था तो बिहार निवासी रोशन के साथ विवाद हो गया था। इन लोगों ने पटना में रोशन की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी। मामले में नीरज बिहार पुलिस से वांछित चल रहा था। एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि ये जालसाज बिहार, नोएडा, दिल्ली, पटना, चंडीगढ़ सहित देशभर में दर्जनों ऑफिस खोलकर ठगी करते रहे हैं। ये 4-5 महीने तक ऑफिस चलाते थे और आखिरी 10 दिन में पैसे लेकर भाग जाते थे। अभी दिल्ली के नेताजी सुभाष पैलेस के पास मॉल में 4 लाख रुपये प्रति महीने का किराये पर ऑफिस लेकर चला रहे थे।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी
1. नीरज कुमार सिंह, औरंगाबाद, बिहार, एमबीए
2. निखिल, पटना, बिहार, बी टेक
3. धीरेंद्र कुमार शर्मा, आजमगढ़, बीए
फरार आरोपी
1. मसरूल हक, फुलवारी शरीफ, पटना, एमबीए
2. विकास सिंह, पटना, बीएसएसी
3. राजेश कुर्मी, नालंदा, बिहार, बीएससी
4. अभिषेक आनंद, कृष्णापुरी, पटना, एमबीए