बीमा धारक साइबर जालसाजों के निशाने पर, एक कॉल से हो रही ठगी
- लैप्स पॉलिसियों को शुरू कराने व बीमा में ऑफर के नाम पर सबसे अधिक जालसाजी
-बीमा के फर्जीवाड़े में फर्जी कॉल सेंटर से लेकर विदेशी कनेक्शन
सुशांत समदर्शी
नोएडा। बीमा धारक साइबर जालसाजों के निशाने पर हैं। खासकर ऐसे बीमा धारक जिनकी पॉलिसी लैप्स हो गई है या जिन्हें नया बीमा करवाना है। कुछ ऐसे पाॅलिसी धारक भी जालसाजों के जद में आ रहे हैं जिन्हें घर बैठे बीमा मैच्योरिटी की रकम भेजे जाने का झांसा दिया जाता है। हाल ही में इस तरह की कई घटनाएं शहर में हुई हैं जिनमें फर्जी कॉल सेंटर से लेकर विदेशी कनेक्शन की बात सामने आई है। पुलिस व यूपी साइबर सेल की टीम ऐसे जालसाजों के पीछे लगी हुई है।
नोएडा व ग्रेटर नोएडा में कॉल सेंटर व ऑफिस खोलकर इंश्योरेंस कंपनियों के ग्राहकों को फोन कर प्रलोभन दिया जा रहा है और उनसे ठगी की जा रही है। पुलिस पहले इस तरह के गैंग को पकड़ चुकी है। फर्जी कॉल सेंटर व दफ्तरों में काम करने वाले अधिकतर आरोपी इंश्योरेंस ब्रोकर कंपनियों में नौकरी करते थे। इस दौरान लोगों से इंश्योरेंस के बारे में जानकारी ले लेते थे। ऐसे जालसाज इंश्योरेंस कंपनियों का डाटा लेकर कूट रचित दस्तावेज आदि बनाकर लोगों से टेलीफोन पर संपर्क करते हैं। आरोपी पॉलिसी धारकों से बात कर बीमा में बोनस देने और बंद पॉलिसी को लाभकारी रूप से दोबारा शुरू करने का लालच देते हैं। झांसे में आने पर आरोपी अलग-अलग बैंक खातों में रुपए जमा करा लेते हैं। पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आती रही है कि ऐसे जालसाज मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस समेत अन्य संस्थानों का फर्जी आईडी बना कर व्हाट्सएप के माध्यम से ग्राहकों को भेजकर विश्वास दिलाते हैं कि ये लोग रजिस्टर्ड हैं। यूपी साइबर सेल के एसपी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि बीमा के नाम पर जालसाजी करने वाले कई गिरोह का पर्दाफाश करते हुए जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है।
एनसीआर से लेकर कई राज्यों में फैला है जाल
बीमा के नाम पर ठगी करने वाले जालसाजों का जाल दिल्ली एनसीआर के अलावा पूरब से लेकर दक्षिण के राज्यों तक फैला है। पहले गिरफ्तार हुए आरोपियों के पास से बरामद डाटा का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की बात कही गई थी। लेकिन इसके बारे में पुलिस कुछ नहीं बता पा रही है। आशंका जताई जा रही है कि इस तरह के जालसाज हैकिंग या किसी कर्मचारी के माध्यम से यह डाटा कंपनियों से प्राप्त करते हैं।
अधिक धनराशि का देते हैं लालच
साइबर जालसाज बीमा के नाम पर फ्रॉड करने के लिए एक सेटअप तैयार करते हैं। आरोपी कॉल सेंटर में युवक-युवतियों को टेली कॉलिंग के लिए हायर करते हैं। इसके एवज में इन्हें सैलरी दी जाती है। जालसाज नामी इंश्योरेंस कंपनियों से डाटा प्राप्त कर इंश्योरेंस कराने वाले लोगों से संपर्क करते हैं। इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने व लैप्स पॉलिसी को रिन्यू कराने तथा इंश्योरेंस को प्री-मैच्योर करने के नाम पर भारी धनराशि देने का लालच देते हैं। इसके एवज में 10 से 30 फीसदी रकम एडवांस में ले लेते हैं।
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हाल की घटनाएं
2८ फरवरी 23: सेक्टर-29 निवासी रवि के साथ इंश्योरेंस के नाम पर 25 हजार की ठगी।
21 जनवरी 23: सेक्टर-20 पुलिस ने 2.67 करोड़ इंश्योरेंस ठगी के नाम पर दो साल बाद जालसाजों को गिरफ्तार किया।
10 जनवरी 23: नोएडा एक्सटेंशन निवासी बुजुर्ग से लैप्स बीमा शुरू कराने के नाम पर 30 हजार की जालसाजी
23 दिसंबर 22: सेक्टर-1 में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा, इंश्योरेंस के नाम पर हो रही थी ठगी।
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इस तरह से हो रही है ठगी
- लैप्स पॉलिसी को दोबारा शुरू करने के नाम पर
- ऑफर के साथ बीमा कराने को लेकर
- प्रीमियम में छूट दिलाने का झांसा देकर
- इंश्योरेंस पॉलिसी सेटेलमेंट के नाम पर
- बीमा पॉलिसी कैंसिल कराने के नाम पर
- बकाया बीमा पॉलिसी की रकम के नाम पर