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पंचायत चुनाव में इंस्पेक्टर हुए बीमार, अब दवा के लिए परेशान

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नोएडा। ब्लैक फंग्स के मामले बढ़ते जा रहे हैं और दवा तक नहीं मिल पा रही है। हालत ये है कि देश की सेवा में लगे इंस्पेक्टर तक के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। पंचायत चुनाव में ड्यूटी के बाद एक इंस्पेक्टर कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अब ब्लैक फंग्स की चपेट में आ गए हैं। रविवार को उनके लिए दवा मिली, लेकिन रोज की जरूरत के मुकाबले आधी से भी कम। गाजियाबाद निवासी वैभव ने बताया कि 54 वर्षीय पिता रकम सिंह की अमरोहा में इंस्पेक्टर हैं। उनकी पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी थी। 22 अप्रैल को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इस पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता को डायबिटीज भी है। कुछ दिनों के बाद ब्लैक फंग्स की पुष्टि होने के बाद अस्पताल प्रबंधक ने दूसरे अस्पताल लेकर जाने के लिए कह दिया।
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ऐसे में 12 मई को सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल आ गए। डॉक्टरों ने 21 मई को उनकी सर्जरी की थी। सर्जरी से पहले एक ब्लैक फंग्स की डोज दी गई थी। अस्पताल के पास दवाई नहीं थी। ऐसे में हम अलग-अलग विभागों में दवाई के लिए चक्कर काट रहे हैं। एक दिन में उनको 300 एमजी के डोज की जरूरत है। रविवार को मेरठ से 50-50 एमजी की दो डोज मिली है, जबकि एक दिन में 300 एमजी की जरूरत है। ऐसे में 50 एमजी के छह इंजेक्शन एक दिन में दिए जाने हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी का कहना है कि ब्लैक फंगस की दवाई लिखने के बाद विभाग की तरफ से परिजन को दवाई लेने के लिए मेरठ भेजा जाता है। वहीं से उनको दवाइयां मिल रही हैं। इंस्पेक्टर के मामले की मुझे जानकारी नहीं है।
ब्लैक फंगस के 7 मामले बढ़े, मेरठ में दवा खत्म
जिले में ब्लैक फंगस बीमारी का खतरा बढ़ता जा रहा है। रविवार को ब्लैक फंगस मामलों की संख्या 24 से बढ़कर 31 हो गई। वहीं, इलाज के लिए जरूरी दवा अभी भी मरीजों के परिजनों को नहीं मिल रही है। आलम यह है कि मेरठ में आए इंजेक्शन भी खत्म हो चुके हैं। रविवार को ब्लैक फंगस के सात नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप है। इन मरीजों का इलाज जिम्स, फोर्टिस, कैलाश आदि अस्पतालों में चल रहा है। अब तक जिले में ब्लैक फंगस से पांच मौतें भी हो चुकी हैं। हालात इस कदर खराब हैं कि जिले के लिए मेरठ पहुंची 70 इंजेक्शन की डोज खत्म हो गई है। ऐसे में कई मरीजों के परिजन इंजेक्शन पाने के लिए रविवार को भी दर-दर भटकते रहे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मेरठ में जिले को इंजेक्शन पहुंचाने के लिए गठित कमेटी को 70 डोज मिली थीं, जो सुबह तक खत्म हो गई। रात तक कुछ और डोज मिलने के आसार हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने कहा कि जिले में ब्लैक फंगस 31 मामले हो गए हैैं। शासन को इस संबंध में सूचित किया गया है। साथ ही, पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने कि मांग की गई है।
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दवा के लिए भटकते रहे लोग
ब्लैक फंगस बीमारी में मरीज की स्थिति, संक्रमण के प्रसार के मुताबिक इलाज किया जाता है। इलाज कुछ हफ्तों से कुछ महीनों तक चल सकता है। एक मरीज को 14 से अधिक इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती है। रविवार को भी फोर्टिस में भर्ती मनोज गोयल, कैलाश अस्पताल में भर्ती समीर माथुर आदि मरीजों के परिजन दवाओं के लिए भटकते रहे। धर्मेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि वह रक्षा मंत्रालय में अधिकारी हैं। उनकी मां कैलाश अस्पताल में भर्ती हैं, काफी जद्दोजहद करने व मेरठ तक चक्कर काटने के बावजूद उन्हें मां के लिए इंजेक्शन नहीं मिला है। धर्मेंद्र ने ट्विटर से सोनू सूद से भी मदद की गुहार लगाई है।
समय पर इलाज हो तो आसानी से ठीक हो जाता है फंगस
चिकित्सकों के अनुसार ब्लैक फंगस की बीमारी नई नहीं है। इसका इलाज भी मौजूद है, लेकिन पहले इसके इक्का-दुक्का मरीज ही सामने आता था। अब बीमारों की संख्या बढ़ने के कारण इलाज में चुनौतियां बढ़ गई हैं। यदि मरीजों को समय से इलाज उपलब्ध हो तो दवाओं की कुछ ही डोज से बीमारी आसानी से काबू में आ जाती है, लेकिन फंगस के ज्यादा फैलने पर सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। समय के साथ जान का खतरा बढ़ता जाता है। डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन फोर्टिस अस्पताल डॉ. अजय अग्रवाल ने बताया कि यह फंगस वातावरण में हमेशा से मौजूद रहा है, लेकिन कोविड से शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर होने, शुगर लेवल बढ़ने के कारण इसका प्रभाव अधिक पड़ रहा है। यह फंगस विभिन्न अंगों पर अपना असर डालता है। इसके प्रभाव के आधार पर ही इलाज तय किया जाता है। यह हड्डी, साइनस, आंखों, मस्तिष्क, फेफड़ों, पेट, आंते आदि को प्रभावित कर सकता है।
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यह लक्षण दिखें तो रहे सावधान
- नाक में दिक्कत महसूस हो रहा हो, लगातार सिरदर्द हो।
- चेहरे के एक हिस्से में दर्द महसूस हो या सूजन आए, सुन्न हो जाए।
- मुंह से खून आना।
- दांत हिलने लगे या दर्द हो।
- बुखार, सांस लेने में दिक्कत, कफ महसूस हो।
- सीने में दर्द, धुंधला दिखना।
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