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अलीगढ़ के ध्यानार्थ : संशोधित

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मासूम ने गंवाए दोनों हाथ, विद्युत निगम और अस्पताल ने झाड़ा पल्ला



- इकलौते बेटे माधव के लाचार होने से सदमे में पूरा परिवार, सीएमओ बोले-शिकायत मिलने पर होगी जांच



संवाद न्यूज एजेंसी



जेवर। निजी अस्पताल और विद्युत निगम की लापरवाही से छह साल के मासूम माधव को दोनों हाथ गंवाने पड़े। लेकिन मामले में जिम्मेदारी लेने के बजाय अस्पताल प्रबंधन और विद्युत निगम के अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। दोनों एक दूसरे पर हादसे की जिम्मेदारी डाल रहे हैं। हालांकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुनील कुमार शर्मा स्पष्ट कहते हैं कि अस्पताल में मरीज व तीमारदारों की सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होने चाहिए। हालांकि वह कहते हैं कि इस मामले में लिखित शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने ही पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। उधर हादसे में इकलौते बेटे के दोनों हाथ गंवाने के बाद पूरा परिवार सदमे में है।



विद्युत वितरण खंड जेवर के अधिशासी अभियंता आलोक प्रकाश कहते हैं कि हादसा अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की वजह से हुआ। इसमें विद्युत निगम का दोष नहीं है। जब हाईटेंशन लाइन बिछाई गई थी तब वहां अस्पताल नहीं था। अगर किसी ने लाइन के नजदीक अस्पताल या घर निर्माण कर लिया तो उसे सुरक्षा के मानकों को भी पूरा करना चाहिए था। उन्होंने बताया कि बच्चे के परिजनों ने उनसे शिकायत देने की बात कही है। मामले की जांच कराने के बाद आगे कुछ बता पाना संभव होगा।
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वहीं चौधरी मेडिकेयर अस्पताल के संचालक अजित चौधरी कहते हैं कि अस्पताल में मरीजों से मुलाकात के लिए समय व मिलने वालों की संख्या निर्धारित है। लेकिन मिलने आनेवाले तीमारदार जबरन अस्पताल में प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने बताया कि जहां हादसा हुआ वहां लोगों के आने-जाने पर प्रतिबंध है। आमतौर पर दरवाजा बंद रहता है। लेकिन हादसे के दौरान कोई कर्मचारी बालकनी में बने स्टोर से समान लेने गया था। इसी बीच बच्चा वहां चला गया। उसने हाईटेंशन लाइन को हाथ से पकड़ लिया। इससे वह बुरी तरह झुलस गया।



इस पूरे प्रकरण पर सहायक पुलिस आयुक्त रूद्र कुमार सिंह कहते हैं कि बच्चे के पिता योगेश चौहान की शिकायत पर तत्काल शिकायत दर्ज कराते हुए मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद है। ऐसे मामले में जिम्मेदारी एक दूसरे के कंधे पर डालने से अस्पताल प्रशासन व विद्युत निगम को बचना चाहिए। दोनों को मिलजुलकर हादसों को रोकने का इंतजाम करना चाहिए।



वहीं माधव के पिता योगेश चौहान कहते हैं कि अस्पताल प्रबंधन व विद्युत निगम की लापरवाही से हादसा हुआ है। लेकिन दोनों में से कोई भी अपनी गलती मानने और जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।







पढाई में रुचि को देखकर निजी स्कूल में कराया इकलौते बेटे का दाखिला



अलीगढ़ के दीवा हामिदपुर गांव निवासी माधव के पिता योगेश चौहान खेतीबाड़ी करते हैं। माधव उनका इकलौता बेटा है। योगेश ने बताया कि माधव पढ़ने में होशियार है। इसी वजह से बेेटे का दाखिला निजी स्कूल में कराया था। कक्षा एक की परीक्षा अच्छे अंक हासिल किए थे।
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23 जून को हुआ था हादसा



योगेश 23 जून को परिवार के साथ बहन को देखने चौधरी मेडिकेयर अस्पताल पहुंचे थे। वहां माधव अस्पताल के छज्जे पर पहुंच गया। जहां हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने के बाद बुरी तरह झुलस गया। उसे दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। माधव के शरीर को संक्रमण से बचाने के लिए बुधवार को चिकित्सकों को उसके दोनों हाथ कटने पड़े। योगेश का कहना है कि उनका मासूम बच्चा इतनी कम आयु में लाचार हो गया। अब उन्हें उसके भविष्य की चिंता है। माधव कैसे जीवन यापन करेगा।
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