चंडीगढ़। इंडस्ट्री चलानी है तो गृह मंत्रालय (एमएचए) के अधिकारी को यहीं बैठाना पड़ेगा। बिल्डिंग बायलॉज में बदलाव हो या इंडस्ट्रियल प्लॉट को होल्ड से फ्री-होल्ड करने की मंजूरी हर फाइल गृह मंत्रालय के पन्नों में उलझकर रह जाती है। उद्यमियों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों पर योजनाएं तो बनाता है लेकिन दिल्ली भेजी फाइलें महीनों-सालों तक अटकी रहती हैं। इसी कारण अब सीधी मांग की गई है कि एक आईएएस स्तर के एमएचए अधिकारी की पोस्टिंग चंडीगढ़ में की जाए।
उद्योगपतियों का सवाल है कि जब सामान रखने की ही जगह नहीं, तो इंडस्ट्री कैसे चलाएं? इंडस्ट्रियल एरिया में शेड लगाने या प्लांट के अंदर पार्टीशन करने पर भी वायलेशन नोटिस थमा दिए जाते हैं। उद्योग जगत का कहना है कि बदलती जरूरत के अनुसार नियमों की समीक्षा जरूरी है अन्यथा रोजगार और इंडस्ट्री दोनों प्रभावित होंगे।
एक उद्यमी के अनुसार इंडस्ट्रियल एरिया में 60 फीसदी इंडस्ट्री ऐसी हैं जिनमें शेड की आवश्यकता है। अपना सामान बनाकर वह कहां ले जाएं। यदि गोदाम लेते हैं तो ट्रांसपोर्ट की आवश्यकता पड़ेगी और गोदाम का किराया अलग से देना होगा। इससे प्रोडक्ट की प्रोडक्शन कॉस्ट भी बढ़ जाएगी। प्रशासन यदि अपनी नीतियों में बदलाव करे तो उद्योग भी पनपेंगे और रेवेन्यू भी बेहतर आएगा।
दो बेटे हों तो उनके लिए अलग काम कहां से दें? इंडस्ट्री के अंदर पार्टीशन तक की अनुमति नहीं। एमएचए के बिना बदलाव संभव नहीं। -आरके गर्ग, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन
मशीन से निकलने वाला सामान रखने को जगह नहीं। गोदाम अलग लें तो खर्च बढ़ेगा। टैक्स पूरा, सुविधा आधी—ऐसा कैसे चलेगा? -रितेश अरोड़ा, वित्त सचिव, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल यूथ एसोसिएशन
95 फीसदी इंडस्ट्री इस स्थिति में है। तीसरी पीढ़ी इंडस्ट्री चला रही है, नियम नहीं बदले तो दम घुट जाएगा। एमएचए ही समाधान है। -मनीष निगम, महासचिव, लघु उद्योग भारती