ग्रेटर नोएडा में अब आईटी के प्लॉट पर अन्य उद्योग भी लग सकेंगे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में बृहस्पतिवार को यह फैसला लिया गया है। इससे 100 से ज्यादा भूखंडों पर उद्योग लग सकेंगे और रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की बृहस्पतिवार को संपन्न 115वीं बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया कि अब आईटी/आईटीईएस के भूखंडों में औद्योगिक इकाइयां भी लग सकेंगी। इसके लिए आवंटी को परिवर्तन शुल्क जमा करना होगा। प्राधिकरण के चेयरमैन व प्रदेश के मुख्य सचिव अनूपचंद्र पाडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। आईटी के प्लॉट पर उद्योग लगाने वालों को औद्योगिक नीति के अनुसार प्रक्रिया को अपनाना होगा।
प्रस्ताव के मुताबिक लीज डीड के बाद अगर भूखंड का मानचित्र नहीं पास है तो उसका नक्शा औद्योगिक नीति के अनुसार पास कराना होगा। ऐसे भूखंड जिनका नक्शा पास है, लेकिन निर्माण शुरू नहीं शुरू किया गया है, उसे भी औद्योगिक नीति के अनुसार नक्शा पास कराना होगा। जिन भूखंडों में नक्शा पास कराकर भवन निर्माणाधीन है। उसका भी मानचित्र संशोधित कराना होगा।
इसके बाद ही निर्माण शुरू किया जा सकेगा, जिन भूखंडों में निर्माण कार्य पूरा करके काम शुरू हो गया है। वहां पर यह सुविधा नहीं मिलेगी। प्राधिकरण क्षेत्र में आईटी/आईटीईएस के करीब 100 से अधिक भूखंड हैं, जिन पर उद्योग लग सकेंगे। मंदी की वजह से आवंटी इन भूखंडों पर कुछ नहीं कर पा रहे थे। इससे रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। बोर्ड बैठक में ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण, यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ अरुणवीर सिंह, नोएडा प्राधिकरण की सीईओ ऋतु माहेश्वरी भी मौजूद रहीं। बैठक में कुल 22 प्रस्ताव पास हुए।
उद्योग लगाने को एक साल और
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अनिर्मित व अक्रियाशील औद्योगिक भूखंडों के ट्रांसफर के अनुमति की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी है। यह सुविधा बीते 17 जुलाई तक थी। आवंटी इसकी तिथि बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इसके तहत अक्रियाशील इकाइयों को कुल बकाया राशि जमा कराने के बाद प्लॉट का ट्रांसफर कर सकता है। ट्रांसफर शुल्क के रूप में उसे वर्तमान आवंटन दर का 30 प्रतिशत प्रति वर्गमीटर की दर से जमा करना होता था। अब इस नीति को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है।