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आधुनिक अयोध्या को मिला प्राचीन ध्वज: जानें कौन हैं ग्रेटर नोएडा के इतिहासकार, इस पेंटिंग से शुरू हुआ था शोध

Sat, 22 Nov 2025 09:34 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

इंडोलॉजिस्ट डॉक्टर ललित मिश्र ने मेवाड़ की रामायण पेंटिंग की स्टडी के दौरान अयोध्या के भूले-बिसरे झंडे की खोज कर ली। वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड में इसके जिक्र से उन्होंने इसकी पुष्टि भी की। अब 25 नवंबर को श्री राम जन्मभूमि मंदिर पर झंडा फहराया जाएगा।
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इंडोलॉजिस्ट ललित मिश्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अयोध्या में 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर के शिखर पर एक विशेष ध्वज फहराएंगे। यह ध्वज ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महागुण माईवुड्स सोसायटी में रहने वाले डॉक्टर ललित मिश्र ने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि मेवाड़ की रामायण के चित्रों से उनकी खोज को गति मिली। यह ध्वज केवल प्रतीक नहीं, बल्कि त्रेता युग की परंपरा, सूर्यवंश की विरासत और सनातन संस्कृति की वैज्ञानिकता का जीवंत स्वरूप है। उन्होंने बताया कि कई महीनों की शोध, प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर किया है। 

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उन्होंने बताया कि यह उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। अयोध्या राम मंदिर शोध संस्थान ने उन्हें ध्वज डिजाइन करने का दायित्व सौंपा था।  इसके बाद उन्होंने त्रेता काल के ध्वजों, रंगों, प्रतीकों और संरचना की गहन जांच की और आधुनिक तकनीक के साथ इसका पुनर्निर्माण किया। उन्होंने बताया कि ध्वज के निर्माण में विशेष फैब्रिक इस्तेमाल किया गया है जो धूल,धूप,मिट्टी और पानी से कम प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि मौसम कितना भी कठिन क्यों न हो, ध्वज हमेशा अपनी भव्यता और पवित्रता बनाए रखेगा। इसे एक विशेष मशीनरी से जोड़ा गया है जो तेज हवा में भी इसे 360° घुमा सकेगी।  

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प्राचीन भारतीय विज्ञान का दिखेगा संगम 
उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय विज्ञान,शास्त्रीय परंपरा,ऐतिहासिक शोध और आधुनिक तकनीक का संगम दिखाई देगा। त्रेता युग की झलक आधुनिक भारत की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में फिर से दिखाई देगी। उन्होंने बताया कि यह ध्वज केवल प्रतीक नहीं, बल्कि त्रेता युग की परंपरा, सूर्यवंश की विरासत और सनातन संस्कृति की वैज्ञानिकता का जीवंत स्वरूप है। 

22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा होगा ध्वज 
इतिहासकार ललित मिश्र ने बताया कि यह ध्वज अयोध्या, सनातन परंपरा, सूर्यवंश और प्रकृति, इन चारों का संगम है। 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़े इस ध्वज को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 360 डिग्री घूम सके, जिससे हर दिशा से श्रद्धालु इसकी भव्यता को समान रूप से देख सकें। उन्होंने बताया कि ॐ: सनातन का शाश्वत आध्यात्मिक स्वर,,सूर्य: भगवान राम के सूर्यवंशी वंश का प्रतिनिधित्व, वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में वर्णित पवित्र वृक्ष इन प्रतीकों के चयन के पीछे गहराई से जुड़ा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक शोध है। 
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कोविदार वृक्ष विशेष पहचान 
उन्होंने बताया कि ध्वज में अंकित कोविदार वृक्ष की पहचान करना बड़ी चुनौती थी। इस वृक्ष की पहचान के लिए उन्होंने मंत्रों और ग्रंथों का विस्तृत विश्लेषण,वनस्पति विज्ञानियों के साथ चर्चा और दुर्लभ वनस्पति अभिलेखों का अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि कई राज्यों के वन क्षेत्रों की यात्राएं किया, जिसके बाद प्रामाणिक कोविदार वृक्ष की पहचान संभव हो पाई। उनका कहना है कि जिस वृक्ष का वर्णन रामायण में बार-बार मिलता है, उसे आज पुनः पहचान दिलाना सनातन संस्कृति की वैज्ञानिक समझ को पुनः स्थापित करना है। 
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