प्राचीन भारतीय विज्ञान का दिखेगा संगम
उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय विज्ञान,शास्त्रीय परंपरा,ऐतिहासिक शोध और आधुनिक तकनीक का संगम दिखाई देगा। त्रेता युग की झलक आधुनिक भारत की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में फिर से दिखाई देगी। उन्होंने बताया कि यह ध्वज केवल प्रतीक नहीं, बल्कि त्रेता युग की परंपरा, सूर्यवंश की विरासत और सनातन संस्कृति की वैज्ञानिकता का जीवंत स्वरूप है।
22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा होगा ध्वज
इतिहासकार ललित मिश्र ने बताया कि यह ध्वज अयोध्या, सनातन परंपरा, सूर्यवंश और प्रकृति, इन चारों का संगम है। 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़े इस ध्वज को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह 360 डिग्री घूम सके, जिससे हर दिशा से श्रद्धालु इसकी भव्यता को समान रूप से देख सकें। उन्होंने बताया कि ॐ: सनातन का शाश्वत आध्यात्मिक स्वर,,सूर्य: भगवान राम के सूर्यवंशी वंश का प्रतिनिधित्व, वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में वर्णित पवित्र वृक्ष इन प्रतीकों के चयन के पीछे गहराई से जुड़ा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक शोध है।