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15 साल बाद भी नूंह में नहीं बना डंपिंग स्टेशन

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नूंह। नूंह को जिला बने करीब पंद्रह साल हो गए है, लेकिन सरकार और प्रशासन कूड़ा निस्तारण की समस्या के बारे में गंभीर नहीं है। नूंह शहर में कूड़े के निपटान के लिए डंपिंग स्टेशन नहीं है। सरकार के स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ाई जा रही है। यही वजह भी है कि सफाई कर्मचारी मजबूरन शहर में कहीं भी कूड़ा डाल देते हैं। इसके कारण शहर में कई जगह कूड़े के ढेर हैं। नूंह शहर में प्रशासन द्वारा जोगीपुर रोड पर डंपिंग स्टेशन के लिए जमीन दे रखी है, लेकिन फिर भी शहर में कई अन्य जगहों पर कूड़ा डाला जा रहा है।
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जिले के मुख्य शहरों की तरह गांवों में भी लोग कहीं भी कचरा डाल देते हैं। इसके कारण गांवों के कई मार्गों पर कूड़े के ढेर लगे हैं। गंदगी से वातावरण के साथ-साथ बीमारी फैलने का अंदेशा है। अनुमान के अनुसार प्रतिदिन करीब सैकड़ों टन कूड़ा निकलता है। इसमें से आधे कूड़े का उठान भी नहीं होता। यहां पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण कूड़ा सड़कों और कॉलोनियों के आस-पास पड़ा रहता है। वहीं इस बारे में पूर्व पार्षद डॉ. मकसूद अहमद, अख्तर चंदेनी, आसिफ चंदेनी, मनोज गोयल, ज्ञानचंद आर्य, डॉ. हनीफ सरपंच फिरोजपुर नमक, राजू पार्षद, मदन तंवर पार्षद ने बताया कि यह समस्या बहुत पुरानी है। इस ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। शहर साफ-सुथरा होगा तभी स्वच्छ भारत मिशन योजना सफल होगी। वे इस बारे में प्रशासनिक अधिकारियों से बात करेंगे। योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए साफ नीयत से कार्य करने की जरूरत है।
लोगों का कहना है कि सफाई के मामलों में कई गांवों की स्थिति शहर से बेहतर है। शहर को गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए न तो नगर पालिका प्रशासन ने कोई रुचि ली और न ही सरकार की ओर से कोई विशेष योजना बनाई गई। नगर पालिका की सुस्ती का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। आज भी कूड़ा निपटान के लिए कोई जगह निर्धारित नहीं होने पर कहीं भी कूड़ा डाला जा रहा है। वहीं इस बारे में नूंह नगरपालिका के नवनियुक्त सचिव राजाराम ने बताया कि उन्होंने हाल ही में शहर की जिम्मेदारी संभाली है, जल्द ही इस ओर ध्यान दिया जाएगा।
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