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‘आंदोलन लंबा चला तो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर हो सकता है खतरा’

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पुन्हाना। हरियाणा-राजस्थान की सीमा सुनहेड़ा बॉर्डर पर किसान आंदोलन के तहत सोमवार को महापंचायत का आयोजन किया गया है। यहां संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक दर्शन पाल सिंह व सदस्य योगेंद्र यादव ने केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों का जमकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन लंबा चला तो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर खतरा हो सकता है।
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सोमवार को धरनास्थल पर मेवात के आखिरी राजा शहीद हसन खां मेवाती के 495वें शहादत दिवस पर हुई महापंचायत में उनकी कुर्बानी को याद करते हुए किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर आरोप लगाए। दर्शन पाल सिंह ने कहा कि किसानों से बातचीत होनी चाहिए, लेकिन सरकार बात करना ही नहीं चाहती। यह आंदोलन घर-घर पहुंच गया है। 109 दिन से चल रहे आंदोलन में किसानों की एकजुटता से सरकार घबराई हुई है। आंदोलन जितना लंबा चलेगा, केंद्र सरकार की कुर्सी पर खतरा बढ़ता जाएगा। जो लड़ाई हसन खां ने अपने वक्त में लड़ी थी, आज उसे पूरे देश के किसान इकट्ठा होकर लड़ रहे हैं।
योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानों के सामने झुकने से मोदी छोटे नहीं हो जाएंगे। जिस तरह प्रधानमंत्री किसानों के सामने सीना तानकर खडे़ हैं, अगर ऐसे ही वे चीन के सामने खडे़ होते तो हालात कुछ और होते। भाजपा को हराने के लिए पश्चिम बंगाल, असम सहित सभी पांच प्रदेशों में आह्वान किया जा रहा है, जो आगे भी जारी रहेगा। मेवात वीरों और शहीदों की धरती है। आज किसानों के वजूद पर हमला हो रहा है। इस लड़ाई में सिर्फ मुसलमान ही नहीं, देश की 36 बिरादरियां शामिल हैं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि मैं किसानों के लिए सौगात लाया हूं। सवाल यह है कि जो सौगात किसानों ने मांगी ही नहीं, उसे जबरदस्ती क्यों दे रहे हैं। यूपी में मुजफ्फरनगर में दंगे के बाद हिंदू-मुसलमान अलग हो गए थे, लेकिन इस आंदोलन ने सभी को एक मंच पर ला दिया है। इस दौरान महापंचायत के संयोजक मौलाना अरशद, रशीद अहमद, मुफ्ती सलीम कासमी, बुरहान हुसैन, परमजीत, मुबारिक अटेरना आदि मौजूद रहे।
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महिलाओं की तादाद बताती
है, हम लड़ाई जीत चुके हैं
किसान नेताओं ने कहा कि मेवाती महिलाएं कभी किसी रैली में नहीं देखी गईं। यह पहली बार है, जब वे अपने हक के लिए घरों से बाहर धरने में शामिल हो रही हैं। योगेंद्र यादव ने कहा कि किसी सभा में औरतें आ जाती हैं तो लगता है कि पूरा समाज खड़ा हो गया है। महिलाओं की भारी तादाद बताती है कि हम लड़ाई जीत चुके हैं।
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