ग्रेटर नोएडा। किसानों के विरोध के चलते करीब आठ लाख ग्रेटर नोएडा वासियों को गंगाजल की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। दिसंबर 2021 से ही किसान पल्ला के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) पर धरना दे रहे हैं। जिसके चलते प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पा रहा है, जबकि गंगाजल आपूर्ति का पूरा नेटवर्क तैयार हो चुका है। शासन ने भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से इस परियोजना को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अब अगर बातचीत से किसान नहीं मानें तो परियोजना को पूरा करने के लिए पुलिस की भी मदद ली जाएगी। प्राधिकरण ने भी पुलिस आयुक्त को इस बाबत सूचना भेज दी है।
लगभग डेढ़ दशक में तमाम बाधाओं को दूर कर दिसंबर 2021 में गंगाजल पल्ला के डब्ल्यूटीपी तक पहुंच गया। ग्रेटर नोएडा में जल्द गंगाजल आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद जताई जाने लगी थी। इस बीच पल्ला गांव में किसान डब्ल्यूटीपी पर ही धरने पर बैठ गए, जबकि जमीन का यह विवाद दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़ा था।
पल्ला से जैतपुर तक करीब 5 किमी पाइपलाइन व डब्ल्यूटीपी की कमिशनिंग का काम होना था। जिससे ग्रेटर नोएडावासियों को शीघ्र गंगाजल मिलने लगता, लेकिन विरोध के चलते काम रुक गया। यहां अभी भी धरना चालू है। परियोजना में देरी पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने भी नाराजगी जताई है। शासन ने इसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पुलिस की मदद भी ली जा सकती है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ अदिति सिंह की तरफ से इसके लिए पुलिस आयुक्त को भी पत्र लिख दिया गया है। अगर धरनारत लोग बातचीत से जल्द नहीं मानें तो पुलिस की मदद से परियोजना को पूरा कराया जाएगा, ताकि ग्रेटर नोएडावासियों को शीघ्र गंगाजल मिल सके। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ अदिति सिंह ने लोगों से विरोध को वापस लेते हुए इस परियोजना को पूरा होने देने की अपील की है। परियोजना अधूरी होने के चलते एक तरफ ग्रेटर नोएडा की 8 लाख आबादी गंगाजल से वंचित है।
कोट
गंगाजल परियोजना ग्रेटर नोएडा के सभी निवासियों के लिए बेहद अहम है। इससे सेक्टरों और गांवों में रहने वाले सभी लोगों को फायदा मिलेगा। धरनारत लोगों से से अपील है कि इस परियोजना को पूरी होने दें, अन्यथा मजबूरन पुलिस से मदद लेनी पड़ेगी। - सुरेंद्र सिंह, सीईओ व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण व कमिश्नर मेरठ मंडल