पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी पति को अदालत ने सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मृतका की सास और देवरानी को भी क्रूरता करने पर क्रमश: दो और तीन साल सजा सुनाई है। हालांकि आरोपी जेठ और जेठानी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने मृतका के परिवार को राहत देने के लिए तीनों दोषियों को एक-एक लाख रुपये (तीन लाख) मुआवजा देने का आदेश दिया है। दो माह में मुआवजा नहीं दिया तो दोषियों की संपत्ति से वसूली होगी। यह फैसला दून के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिवा की अदालत ने 22 सितंबर को सुनाया। उन्होंने सीमा परवीन के साथ क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए पति अमजद अली को दोषी ठहराया। सास रईसा खातून और देवरानी अल्फिया को सिर्फ क्रूरता का दोषी पाया। जेठ आबिद अली और जेठानी समीना खातून को सभी आरोपों से बरी कर दिया। जांच में पाया गया कि सीमा की मौत शादी के सात साल के भीतर हुई थी। इसलिए मामला दहेज हत्या की धारा 304ए के तहत दर्ज हुआ लेकिन पति सीसीटीवी साक्ष्य से यह साबित करने में सफल रहा कि वह घटना वाले दिन वहां नहीं था। उस पर पत्नी को दहेज के लिए जलाने का आरोप साबित नहीं हुआ। मा.सि.रि.