- झूठी एफआईआर करने पर महिला के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) ने एक कंपनी के एचआर मैनेजर को दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया है। साथ ही अदालत ने शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने और गलत साक्ष्य देने पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
बीते साल 25 मार्च को नोएडा के फेज-3 थाने में महिला ने एफआईआर दर्ज कराई थी। उसने एचआर मैनेजर करण गुजराल पर दुष्कर्म के आरोप लगाए ते। महिला ने शिकायत में कहा था कि गुजराल ने उसके खाने-पीने में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही वह उसे होटल में बुलाकर एक साल से अधिक समय तक दुष्कर्म करता रहा और शादी का झांसा देता रहा। गर्भवती होने पर आरोपी ने उससे संपर्क करना बंद कर दिया। मामले में पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
हालांकि ट्रायल के दौरान महिला अपने आरोपों से मुकर गई। उसने अदालत को बताया कि उसकी नौकरी नियमित नहीं थी। वेतन भुगतान में देरी से वह नाराज थी। सहकर्मियों की सलाह पर वह पुलिस के पास गई थी।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट के सामने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-164 के तहत दर्ज बयान तब तक ठोस साक्ष्य नहीं माने जा सकते। जब तक उन्हें अन्य साक्ष्यों से पुष्ट न किया जाए। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने एचआर मैनेजर को आरोपों से बरी कर दिया।