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बिना अध्यापक कैसे जलेगी शिक्षा की लौ

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बिना अध्यापक कैसे जलेगी शिक्षा की लौ
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फिरोजपुर झिरका। खंड में शिक्षकों की कमी से सैकड़ों बच्चों का भविष्य अंधकार में लटक गया है। बेहतरीन शिक्षा देने के सरकार भले ही लाख दावे कर ले, लेकिन इन दावों की धरातल पर पोल खुलती नजर आ रही है। खंड के सरकारी स्कूल कई वर्षों से अध्यापकों की कमी से जूझ रहे हैं। अध्यापकों की कमी को पूरा कराने के लिए अभिभावकों ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल से मुलाकात करने का समय मांगा है।
फिरोजपुर खंड में शिक्षा विभाग के अनुसार, 100 प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या के अनुपात में 792 अध्यापकों के पद स्वीकृति है, जिनमें से 277 अध्यापक मौजूद है। 515 अध्यापकों के पद पिछले कई वर्षों से रिक्त पड़े हुए है। अध्यापकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में बच्चों को पूरे साल कई विषयों को पढ़ाया ही नहीं जाता, फिर कैसे विद्यार्थीं आगे की कक्षाओं में पढ़ाई बेहतर कर पाएंगे। खंड में मिडिल स्कूलों की संख्या 62 है और 236 अध्यापक के पद स्वीकृति है, जिनमें 86 अध्यापक मौजूद है। 150 अध्यापकों के पद 2007 से खाली पड़े हुए है। कई मिडिल स्कूलों में गणित, अंग्रेजी, साइंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों के एक भी अध्यापक मौजूद नहीं है। 4 हाई और 10 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में भी अध्यापकों की कमी है।
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जिले के वरिष्ठ समाजसेवी व शिक्षाविद असमत खां ने अध्यापकों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चार दशक पूर्व सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए कोई तैयार नहीं था। अध्यापक जबरन घरों से बच्चों को पकड़वा कर स्कूल में पढ़ाते थे, लेकिन आज जब अभिभावक बच्चों को स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं तो अध्यापक नहीं है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की कमी का दोष सिर्फ वर्तमान सरकार के सिर नहीं है बल्कि पूर्व के सरकारों की कमी के कारण भी यह हाल हुआ है।
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अभिभावक साकिर, जलेबा, अजरुदीन, शिक्षाविद काले खां- सबरस, नसीम अहमद आदि ने कहा कि वर्तमान स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने बच्चे बोर्ड की परीक्षाओं में नकल कर पास हो कर शिक्षित मजदूर तो बन सकते हैं, लेकिन अधिकारी बनना असंभव है।। अभिभावकों ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल से मुलाकात करने का समय मांगा है। सरकारी स्कूलों में पर्याप्त अध्यापको की कमी को दूर करने की मांग रखेंगे।
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