-बिना किताबों के कक्षा छह से आठ तक के बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
दिनेश देशवाल
नूंह। सरकार और प्रशासन एक तरफ तो प्रयास कर रहे है कि अधिक से अधिक बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिला लें तथा जिन बच्चों ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी है, वे भी दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई जारी करें। इसके लिए उपायुक्त से लेकर स्कूल स्तर तक सभी अधिकारी और कर्मचारियों ने गांव-गांव जाकर लोगों को जागरुक किया। लेकिन दूसरी तरफ शिक्षा विभाग की लापरवाही प्रशासन के इन प्रयासों पर भारी पड़ रही है।
शिक्षा का नया सत्र शुरु हुए करीब एक माह बीत गया है, लेकिन अभी तक स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच पाई है। बिना किताबों के बच्चे स्कूल तो जा रहे है, लेकिन पढ़ाई नहीं कर पा रहे। जिसके चलते परिजन भी कहने लगे है कि दाखिले के लिए तो अध्यापक घर-घर जा रहे थे, लेकिन अब फिर वही लापरवाही ना किताब, ना वर्दी ना बैग, बच्चे स्कूल जाकर दिनभर मस्ती करते है। बता दें कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बाल वाटिका से लेकर 8वीं कक्षा तक बच्चों को किताबें स्कूल में निशुल्क दी जाती है जबकि बैग और वर्दी के पैसे सरकार द्वारा बच्चों के खाते में डाले जाते है।
हर वर्ष शिक्षा विभाग जिन ठेकेदारों को इनका टेंडर देता है, वे देरी से ही सामान पहुंचाते है। बहुत से बच्चे तो निशुल्क किताबों के इंतजार में बाजार से नई किताबें भी खरीद लेते है तो कुछ पुरानी किताबें खरीदकर काम चलाते है। इस बार क्योंकि कक्षा 6 का पाठयक्रम भी बदला है तो बच्चों को नई किताबें ही लेनी पडेंगी। लेकिन ठेकेदार ने इस बार भी लापरवाही करते हुए बाल वाटिका व कक्षा 1 और 2 तथा कक्षा 6 से लेकर 8वीं तक की किताबें स्कूलों में नहीं पहुंचाई है। केवल कक्षा 3, 4 और 5 की किताबें ही अभी स्कूलों में पहुंची है।
बाल वाटिका तीन में बढ़े हैं दाखिले:
प्रशासन और शिक्षा विभाग के प्रयासों का असर दिखने लगा है। दाखिलों के शुरुआती दौर में ही बाल वाटिका तीन में बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। अब तक के जिला नूंह के सरकारी स्कूलों में बाल वाटिका 3 में लगभग 6 हजार बच्चे दाखिला ले चुके है और दाखिला प्रक्रिया अभी भी चल रही है। जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि पिछले वर्ष के 10500 के आंकड़े को इस बार पार कर लिया जाएगा।
अभी कक्षाओं में चल रहे है क्लास रेडीनेस प्रोग्राम:
एफएलएन कॉर्डिनेटर कुसुम मलिक ने बताया कि अभी कक्षाओं में बच्चों को पिछले पाठयक्रम को ठीक से कराने के लिए क्लास रेडीनेश प्रोग्राम चल रहे है। अध्यापकों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है और 25 मई तक यह प्रोग्राम चलेगा, जिसके बाद बच्चों को किताबों की आवश्यकता होगी। बहुत जल्द स्कूलों में किताबें पहुंच जाएंगी।
बोले अभिभावक
बच्चों के अभिभावक गुलजारी, राकेश, अभय सिंह, मुस्तफा घासेडा, खालिद हुसैन, किसन नंबरदार, रामसिंह आदि ने बताया कि सरकारी किताबों के इंतजार में बच्चों को बाजार से नई किताबें दिलवानी पड़ी है। हर वर्ष किताबों को लेकर यही हाल रहता है, जब आधा सत्र बीत जाता है तो किताबें स्कूलों में पहुंचती है। सरकार व प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करे ताकि बच्चों की पढ़ाई के साथ लापरवाही न हो।
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वर्जन
कक्षा 6 से 8 तक की किताबें जल्द ही स्कूलों में पहुंचा दी जाएंगी।
अजीत सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी