स्क्रीन पर घंटों का सफर, धुंधली हो रही नजर
- राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन दर्ज हो रहे 15 से 20 केस
-आंखों में ड्राईनेस, नजर कमजोर होना और सिरदर्द जैसी दिक्कतें हो रहीं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। घंटों ऑनलाइन रहकर मोबाइल पर रील्स देखने का शौक आंखों की रोशनी कम कर रहा है। इससे सबसे अधिक प्रभावित बच्चे हो रहे हैं। यह लत युवाओं की भी रोशनी तेजी से चुरा रही है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में प्रतिदिन ओपीडी में 15 से 20 केस दर्ज हो रहे हैं। डॉक्टर मरीजों को पास की चीजें दिखने और दूर की धुंधली नजर आने की समस्या के उपाय बता रहे हैं। उनका कहना है कि मायोपिया की इस बीमारी से बचने के लिए मोबाइल और टीवी देखने का समय कम करें। बच्चों में मोबाइल की लत और युवाओं में घंटों लैपटॉप पर बिताने के कारण आंखों की समस्या बढ़ी है।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. केके गुप्ता ने बताया कि रील्स को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि लोगों का ध्यान लंबे समय तक भटके नहीं। इसलिए लोग लंबे समय तक बिना पलक झपकाए स्क्रीन पर देखते रहते हैं। रील्स देखने से पलक झपकाना करीब 50% तक कम हो जाता है। इससे आंखों में ड्राईनेस, नजर कमजोर होना और सिरदर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अगर इस हैबिट्स पर कंट्रोल नहीं किया गया तो इससे आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है। इसके अलावा घंटों मोबाइल देखने को कम उम्र में ही बच्चे मायोपिया का शिकार बनते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पलक झपकाना आंखों की नमी बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। सामान्य तौर पर, हम एक मिनट में 15-20 बार पलक झपकाते हैं, लेकिन जब हम मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन पर ध्यान लगाते हैं, तो यह घटकर 5-7 बार प्रति मिनट रह जाता है।
आंखों को ऐसे बचाएं
20-20-20 रूल अपनाएं- हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें
पलक झपकाने की आदत डालें- स्क्रीन देखते समय बार-बार पलक झपकाने की कोशिश करें
ब्लू लाइट फिल्टर लगाएं- मोबाइल और लैपटॉप पर नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर ऑन करें
स्क्रीन टाइम कम करें- दिनभर में 1-2 घंटे का डिजिटल ब्रेक जरूर लें
आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें- आंखों की नमी बनाए रखने के लिए डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप्स लें