शहर की ज्वलंत समस्याओं पर व्यापारियों का दर्द एक बार फिर छलका। अमर उजाला के संवाद में व्यापारियों ने शहर में गंदगी और जलभराव की समस्याओं पर अपना गुबार निकाला। व्यापारी बोले शहर में सड़कों की हालत बदतर है। वक्त पर कूड़ा नहीं उठ रहा, जिससे गली-मोहल्लों में गंदगी का साम्राज्य है।
सादाबाद गेट स्थित सिटी प्लाजा में आयोजित अमर उजाला संवाद में व्यापारियों ने कहा कि शहर की सबसे पॉश कॉलोनी वसुंधरा एन्क्लेव हो या आवास-विकास कॉलोनी, सभी जगह गंदगी का अंबार है। सड़कें बेहद बदतर हालत में हैं। जल निकासी की व्यवस्था भी रामभरोसे है।
अफसोस की बात तो यह है कि इन कॉलोनियों में कई अधिकारियों के आवास बने हैं, फिर भी यहां की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए पहले समय में चल रही घर-घर से कूड़ा संकलन करने की योजना ठप पड़ी है। इस कारण समय से गली-मोहल्लों से कूड़ा नहीं उठ पाता। शहर में जाम की समस्या के इलाज के लिए ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना और अतिक्रमण हटाने की मांग भी शिद्दत से उठी।
ट्रांसपोर्ट नगर की आवश्यकता बड़ी है। बावजूद इसके अभी तक ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण नहीं हो रहा। त्योहारी सीजन में व्यापारियों को सबसे अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है। बाजारों में वाहन नहीं जा पाते। ऐसे में व्यापारियों का माल कैसे पहुंचे।
-मोहित कुमार।
सरकार को सबसे अधिक राजस्व व्यापारी देता है, फिर भी सरकार के नियम ऐसे हैं कि जैसे व्यापारी ही सबसे बड़ा चोर है। इस मानसिकता में बदलाव होना चाहिए। शत-प्रतिशत व्यापारियों को जीवन व चिकित्सीय बीमा व अन्य सुविधाओं से सीधे जोड़ना चाहिए।
-कमल शर्मा।
वसुंधरा एन्क्लेव शहर की वीवीआईपी कॉलोनी है। 80 फीसदी जिला स्तरीय अधिकारी इस कॉलोनी मेें निवास करते हैं। बावजूद इसकेे यहां सफाई और सड़क जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं नहीं हैं। इस कॉलोनी में कई जनप्रतिनिधि भी रहते हैं, फिर भी विकास नहीं हो रहा।
-नवजोत शर्मा।
अखबार काफी बेहतर कार्य करता है, हमारी बातों को समाज व अधिकारियों के सामने लाता है, लेकिन अखबार को चाहिए कि वह यह भी बताए कि आम लोगों की समस्याओं के निस्तारण के लिए कितना काम हुआ अथवा नहीं हुआ।
-अमित अग्रवाल।
शहर की सफाई व्यवस्था इस समय रामभरोसे है। इस पर फोकस करने की बड़ी आवश्यकता है। छोटे मोहल्लों से लेकर शहर की बड़ी कॉलोनियों व बाजारों तक, सभी जगह गंदगी ही गंदगी ही है। नगर पालिका का काम ढीला है।
-ओमप्रकाश वर्मा।
अतिक्रमण व जाम शहर की सबसे बड़ी समस्या हैं। गिजरौली पर कबाड़ वालों और अलीगढ़ रोड पर चाट-चौपाटी वालों का अतिक्रमण इसका उदहारण है। औद्योगिक पार्क के निर्माण के लिए अभी कुछ नहीं हो रहा।
-सुरेश अग्रवाल।
शहर में बहुत समस्याएं हैं, लेेकिन कूड़ा संकलन न होना, अतिक्रमण और जाम काफी अहम हैं। बंदरों के उत्पात से निजात दिलाने के प्रयास कागजों पर ही दौड़ रहे हैं। किसी भी जनप्रतिनिधि की ओर से इसके निदान के लिए पहल नहीं की जा रही।
-योगेंद्र शर्मा, योगा पंडित।
आवास-विकास कॉलोनी में कई घर और पार्क हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था नाम के लिए भी नहीं है। यहां के मंदिर के आगे ही जलभराव है। लोगों का मंदिर तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। आईजीआरएस पर कई बार शिकायत की है, लेकिन कुछ नहीं हो रहा।
-देवेंद्र गोयल।
नगर पालिका तो इस समय काफी लापरवाही बरत रही है। शहर के अलीगढ़ रोड, घास की मंडी आदि जगहों पर पाइपों के लीकेज सही करने के लिए गड्ढे खोद दिए गए हैं, लेकिन इन्हें भरने के लिए कुछ नहीं हो रहा।
-अनूप अग्रवाल।
समस्याएं आम आदमी उठा रहा है। आईजीआरएस आदि पर उनकी शिकायत हो रही है, लेकिन उनका कब निस्तारण हो गया, इसका पता ही नहीं चल रहा। शिकायतकर्ता को बताया जाना चाहिए कि कब, कहां किस समस्या का क्या निस्तारण हुआ।
-चक्रवर्ती गोयल।
ट्रेनों की सुविधा हाथरस में नहीं है। रेलवे अधिकारी इसके लिए उदासीन हैं। मेंडू से हाथरस जंक्शन स्टेशन को जोड़ा जाना है, लेकिन मामला वर्षों से लटका पड़ा है। हैरत की बात यह है कि योजना कब तक पूरी होगी, रेलवे अधिकारियों पर इसका जवाब ही नहीं है।
-दिनेश सरदाना।
नगर पालिका अब भूजल को भी गंदा करा रही है। पुराने हैंडपंप उखाड़े जा रहे हैं और उनकी बोरिंग वैसे के वैसे छोड़ी जा रही है। इन बोरिंग में शहर का गंदा पानी जा रहा है। घंटाघर पर तो टीडीएस 600 के पार पहुंच गया है।
-उत्कर्ष शर्मा।
अखबार इस समय हेलमेट के लिए अभियान चला रहा है, अच्छी बात है, लेकिन आरसीसी सड़कों पर एयर के लिए गैप छोड़ा जाता है, जो समय के साथ बड़ा हो जाता है। इस पर किसी का ध्यान नहीं है। जब यह गैप बड़ा रूप धारण कर रहे हैं तो हादसे भी हो रहे हैं।
-कपिल अग्रवाल।