विश्व हेपेटाइटिस दिवस
-चाइल्ड पीजीआई की रिपोर्ट के मुताबिक संदिग्ध मरीजों में 50 प्रतिशत आ रहे हेपेटाइटिस ए पॉजिटिव
-जिला अस्पताल की रिपोर्ट के मुताबिक हेपेटाइटिस क्लीनिक में बी और सी के मरीज अधिक मिल रहे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। हेपेटाइटिस को एक साइलेंट किलर बीमारी माना जाता है। इसका सीधा असर लिवर पर पड़ता है। जबतक इसके लक्षण सामने आते हैं तब तक लिवर गंभीर रूप से संक्रमित हो चुका होता है। हेपेटाइटिस का असर बड़े, बुजुर्गों समेत बच्चों पर भी अधिक देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक युवाओं और बच्चों में खराब खानपान की वजह से हेपेटाइटिस ए के मरीज अधिक देखने को मिल रहे हैं। वहीं, हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों की संख्या भी लगातार सामने आ रही है।
सेक्टर-30 स्थित चाइल्ड पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की हेड डॉ. सुमी नंदवानी ने बताया, संस्थान में हेपेटाइटिस ए, बी और सी की जांच की जाती है। इस दौरान यह देखा जा रहा है कि बच्चों में सबसे अधिक हेपेटाइटिस ए मिल रहा है। दूषित खानपान से फैलने वाली इस बीमारी का सीधा असर बच्चों के लिवर पर पड़ता है। सामान्य दिनों में भी हेपेटाइटिस ए का पॉजिटिविटी रेट 50 प्रतिशत रहता है। यदि 50 बच्चों की जांच की जाती है तो इसमें करीब 25 बच्चे पॉजिटिव आते हैं। इसके अलावा 1 से 2 प्रतिशत बच्चों में बीमारी गंभीर हो जाती है।
हेपेटाइटिस बी और सी के मरीज भी मिल रहे
जिला अस्पताल के जनरल फिजिशियन डॉ. एसके गुप्ता ने बताया, राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण प्रोग्राम के तहत जिला अस्पताल में शुक्रवार और मंगलवार को हेपेटाइटिस क्लीनिक चलाया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक हर माह हेपेटाइटिस बी के 5-6 नए मरीज और हेपेटाइटिस सी के 15-20 नए मरीज इलाज के लिए आते हैं।
सेक्टर-110 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नवीन कुमार ने बताया, हेपेटाइटिस को साइलेंट डिजीज इसलिए कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। कई मरीज वर्षों तक बिना किसी परेशानी के सामान्य जीवन जीते रहते हैं और बीमारी का पता तब चलता है, जब लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर या लिवर कैंसर जैसी गंभीर स्थिति बन चुकी होती है।
10-15 प्रतिशत लिवर इंफेक्शन के मरीज
सेक्टर-128 स्थित मैक्स हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. संजय कुमार ने बताया कि हेपेटाइटिस ए के मामले युवाओं और बच्चों में तेजी से बढ़ रहे हैं। पेट और लिवर की ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में से लगभग 10 से 15% मामले हेपेटाइटिस या लिवर इंफेक्शन के होते हैं। बारिश मौसम में यह संख्या और बढ़ जाती है। दूषित खान-पान के कारण हेपेटाइटिस ए सबसे आम हैं लेकिन, हेपेटाइटिस बी चिंता का विषय है। क्योंकि यह लंबे समय तक शरीर में रहकर लिवर कैंसर या लिवर फेलियर का कारण बन सकता है।
-हेपेटाइटिस ए - दूषित भोजन और पानी के सेवन से
-हेपेटाइटिस-बी - संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई, असुरक्षित चिकित्सा या कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं और संक्रमित मां से बच्चे में जन्म के दौरान फैल सकता है।
-हेपेटाइटिस-सी - संक्रमित रक्त के संपर्क, असुरक्षित इंजेक्शन, बिना स्टरलाइज किए गए उपकरणों और बिना पर्याप्त जांच किए गए ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण।
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इन बातों का रखें ध्यान -
हाथों की सफाई रखें
घर का बना हुआ खाना खाएं
ठंडी और रखी चीजें न खाएं
बाहर का खाना खाने से बचें।
असुरक्षित यौन संबंध से बचें
टैटू और सैलून में सतर्कता बरतें
इस्तेमाल की गई सुई का इस्तेमाल न करें।
लक्षण
आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ना
पीली पेशाब होना
लगातार थकान लगना या कमजोरी महसूस होना
पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द होना
जी मिचलाना, उल्टी आना