विश्व हीमोफीलिया दिवस आज
- फैक्टर-8 और फैक्टर-9 की कमी को कहा जाता है हीमोफीलिया
- यह ऐसी अनुवांशिक बीमारी है, जो जेंडर को प्रभावित करती है
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। जब आपका बच्चा चलना शुरू करता हैं। गिरने या अन्य किसी कारण से चोट लग जाती हैं और रक्त नहीं रूकता हैं, तो अभिभावक सावधान हो जाए। यह आपके बच्चे में हीमोफीलिया के लक्षण हो सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, यह बीमारी लगभग पांच हजार लोगों में से एक व्यक्ति में होती हैं। यह एक जन्मजात अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है।
ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के बाल रोग विभाग में हर महीने इस बीमारी के कारण करीब एक या दो बच्चे इलाज के लिए आते हैं। लेकिन अस्पताल में इस बीमारी का अभी इलाज संभव नहीं हैं। इस कारण बीमारी की पुष्टि होने पर बच्चों को नोएडा के चाइल्ड पीजीआई के लिए रेफर कर दिया जाता हैं। उनका कहना है कि समय पर पहचान और सही उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, जिम्स के बाल रोग विभाग की असिस्टेंट प्रो. डॉ. संजू यादव ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण बच्चों में करीब नौ महीने बाद ही दिखाई देने लगते हैं। यह ऐसी अनुवांशिक बीमारी है, जो जेंडर को प्रभावित करती है। महिलाओं में लक्षण न के बराबर होते हैं, जबकि उनके भाई व पिता में इसके लक्षण स्पष्ट दिखाई देंगे। गर्भावस्था के दौरान जब भी जांच कराएं तो महिलाएं डॉक्टर को जरूर बताएं कि पिता या भाई को हीमोफीलिया है।
लंबे समय तक बहता है खून :
डॉ. संजू यादव ने बताया कि सामान्य व्यक्ति को चोट लगने पर खून दो से तीन मिनट में स्वतः बंद हो जाता है, लेकिन हीमोफीलिया के मरीजों में खून लंबे समय तक बहता रहता है। इसका मुख्य कारण शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर्स की कमी होना है। खासतौर पर फैक्टर-8 और फैक्टर-9 की कमी को ही हीमोफीलिया कहा जाता है। उन्होंंने बताया कि इस बीमारी में कभी-कभी बिना चोट के भी ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जो मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। बच्चों में बार-बार सूजन, जोड़ों में दर्द या मामूली चोट के बाद अत्यधिक खून बहना इसके प्रमुख लक्षण हैं। यदि समय रहते इस बीमारी का पता चल जाए, तो मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।