उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के दादरी इलाके में मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रेलवे रोड स्थित एक निजी लैब पर छापा मारा। यहां कोरोना टीकाकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा था। टीम ने मौके पर पहुंचकर टीकाकरण को बंद कराया और दादरी कोतवाली में शिकायत दी।
शिकायत पर पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि 18 लोगों को जाईडेक्स कैडिला के नाम से वैक्सीन की डोज लगाई जा चुकी थी। मामले में स्वास्थ्य विभाग ने जांच कर कार्रवाई की बात कही है।
दादरी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी संजीव सारस्वत ने बताया कि रेलवे रोड पर निजी लैब है। जहां कुछ लोग कोरोना टीकाकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे थे। सूचना पर टीम के साथ मौके पर पहुंचे और टीकाकरण बंद कराया। उन्होंने बताया कि टीकाकरण निशुल्क किया जा रहा था।
मौके से वैक्सीन की 35 वॉयल मिली हैं। इनमें से 25 बंद और 10 खुली हुई हैं। एक वॉयल से दो लोगों को डोज दी जाती है। बताया कि भारत सरकार की ओर से कोरोना की दो वैक्सीन को ही अनुमति दी गई है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की तरफ से ही टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन दादरी स्थित निजी लैब पर पांच डॉक्टरों का गिरोह शिविर लगाकर लोगों को वैक्सीन लगा रहा था।
वैक्सीन का नाम जाईडेक्स कैडिला है। इसकी प्रशासन से कोई अनुमति नहीं है। उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कोतवाली में शिकायत दी गई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। कोतवाली के प्रभारी राजबीर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लिखित शिकायत मिली है। रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
ट्रायल में वैक्सीन, किसी को लगा नहीं सकते
सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी का कहना है कि दादरी की एक निजी लैब में कोविड वैक्सीन लगाने की सूचना मिली थी। लैब को सीज कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि जो वैक्सीन मिली है, उसका नाम जाईडेक्स कैडिला है। उसकी जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में पता चला है कि यह वैक्सीन अभी ट्रायल में है। इसको लगा नहीं सकते।
वहीं, पैसे लेकर वैक्सीन लगाने की भी सूचना है। वहीं, वैक्सीन निशुल्क लगाने मतलब है कि लोगों पर इसका ट्रायल किया जा रहा था। इस बिंदु की भी जांच की जाएगी। वहीं, जिन लोगों को वैक्सीन लगाई गई है, उनके बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने बताया कि यह भी पता चला है कि वैक्सीन गाजियाबाद स्थित एक निजी अस्पताल से आई है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्हें इसकी अनुमति है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग इस बिंदु की भी जांच करेगा।